Wednesday, May 27, 2020

नेहरू बेरूत

यह बेरूत,लेबनान की तस्वीरें हैं, सन साठ की,नेहरू को बेरूत की यूनिवर्सिटी में सुनने की ललक देखिये,यूनिवर्सिटी हॉल में जगह नही मिलने के बावजूद स्टूडेंट खिड़कियों में लटके सुन रहे हैं....
नेहरू बेरूत में क्या बोले यह महत्वपूर्ण नही था,बल्कि सबसे महत्वपूर्ण था कि वह बेरूत में क्या नही बोले ?

फिलस्तीन होते हुए जब वह बेरूत उतरे तो उनके भाषण से सभी मंत्रमुग्ध थे और उनकी तारीफों के किस्से आम होने लगे । जब नेहरू भारत लौटे और उन्होंने इस दौरे की बातें संसद में रखी,जैसा वह हमेशा करते कि हर विदेश यात्रा का पूरा ब्यौरा सभी सांसदो को संसद भवन में देते । यहीं उन्होंने खुलासा किया कि जब वह भारतीय एयरफोर्स के जहाज़ से जा थे थे तो इज़राइल के दो लड़ाकू विमान ने उनके जहाज़ को गिराने की कोशिश की,वह भी यह जानकर की इसमे भारत के प्रधानमंत्री मौजूद हैं ।

संसद में नेहरू जी से पूछा गया कि जब इतनी महत्वपूर्ण घटना घटी और आपपर जानकर इज़राइल ने हमला किया,तो आपने बेरूत में इस बात को क्यों नही उठाया,वहां इस करतूत की भत्सर्ना क्यों नही की,तब नेहरू बोले ।

इज़राइल हमे मारना नही चाहता था,बस चाहता था कि हम वह बात जो कहने निकले हैं, वह न कहें और सारी बातें हम पर हुए हमले के शोर में गुम हो जाएँ । इसलिए हमने खुद पर हुए दुस्साहसिक हमले का ज़िक्र बेरूत में नही किया और वहाँ वही बातें कहीं,जो करना महत्वपूर्ण था । आप सांसदों को हर सच मालूम होना चाहिए इसलिए यह बताया ।

यहाँ कितना कुछ सीखा जा सकता है कि आपकी बात महत्वपूर्ण है या आपका जेल जाना,आपका लक्ष्य महत्वपूर्ण है या आपकी चर्चा,इनमे से जितना आप समझ सकेंगे,उतना ही नेहरू को जान पाएँगे, बाकी रही लोकप्रियता तो सत्तरह साल आखरी साँस तक हमारे पुरखों ने उन्हें चुनकर बैठाया था और आज जब वह चले गए,तब करोणों घरों में खाना नही पक्का था,आँखे नम थीं ,इसके लिए किसी वट्सएप फॉरवर्ड या ट्रोल लेहड़ी की ज़रूरत नही है, दुनिया उन्हें ऐसे ही सुनती थी जैसे बेरूत के युवा सुन रहे हैं...
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