Wednesday, May 6, 2020

बुद्ध पूर्णिमा

जब सोने की चमक महलों को रोशन कर रही थी।शुद्दोधन और महामाया कपिलवस्तु की खूबसूरती निखार रहे थे।महामाया ने जब महल से बाहर कदम रखा तो लुम्बिनी के जँगल में एक बच्चे को जन्म दिया,सिद्धार्थ। वही सिद्धार्थ जो सोलह साल की उम्र में यशोधरा की रूह बना और राहुल का साया बना।वही सिद्धार्थ जिसने शुद्दोधन से कहलवा लिया की बचाने वाला मारने वाले से बड़ा है।ईसा से 563 साल पहले पैदा होने वाला सिद्धार्थ जब दुनिया का सारा उरूज,चमक,परिवार,दोस्त,खानदान तज कर जँगल में निकला।

पैरो में काँटे चुभे,धूल,धूप, बारिश,आँधी,भूख ने तोड़ा मगर वह डिगा नही।हम और आप जब मामूली सी ख्वाहिशों को नही छोड़ पाते तब उसने ज़रूरतों को छोड़ा।जब वह लौटा तब सिद्धार्थ खत्म हो चुका था।दुनिया ने तब गौतम बुद्ध को देखा।आज बुद्ध पूर्णिमा है, मेंरे गौतम का दिन है।मुझे जिसने बताया इंसान सिर्फ इंसान है, उसमे कोई फ़र्क नही।ख़िदमत सिर्फ ख़िदमत है जो बिना फ़र्क की जाए।गौतम ने बहुत पहले सत्य, अहिँसा का वह दर्शन दिया जो लोग भूल चुके थे।बुद्ध को पूजने से ज़्यादा बुद्ध को ज़िन्दगी में उतारना होगा।ज़िन्दगी बयानबाज़ी से नही प्रयोग से बढ़ती है।बुद्ध के प्रयोग से।आइये हम सब बुद्ध से प्रयोग करना सीखा, जिससे हर इंसान की ज़िन्दगी आसान हो जाए।रूहे सुकून पा जाए।दिल की तड़पन और कसक खत्म हो जाए।

मां के प्रति समर्पण देखना हो तो गौतम की सौतेली माँ और मौसी प्रजापति गौतमी के बारे में भी जानना। एक बेटे का माँ के प्रति समर्पण पढ़ना।यह तक देखना की बुद्ध के संघ में जहाँ महिला प्रवेश भी नही कर सकती थीं। बुद्ध ने अपनी माँ की ख्वाहिश में उन नियम को ही बदल डाला।प्रजापति गौतमी वोह पहली महिला बनी जिन्होंने बुद्ध की दीक्षा ली।बुद्ध को लगा कहीं माँ की ममता में नियम इतने शिथिल न हो जाएँ की मोक्ष का मार्ग संकरा हो जाए तो थोड़ी सख्ती भी रखी।मैं जब बुद्ध को देखता हूँ तो मन एक तरफ ठहर नही पाता।एक जगह वोह माँ के लिए झुकते हैं तो दूसरी जगह मोक्ष के लिए अड़ते हैं।एक तरफ दिल में नरमी तो दूसरी तरफ अपने ही जिस्म पर सख्ती।बुद्ध को देख वर्तमान से लड़ने को बहुत कुछ मिलता है।भूतकाल से पीछा छुड़ाने का मार्ग बुद्ध का है तो भविष्य की वैज्ञानिक समझ भी तो बुद्ध की ही है।

आखिर बुद्ध में ऐसा क्या था की उनके मानने जानने और समझने वाली भूमि या देश खूब तरक्की कर गए,उन्होंने सुक़ून औरों से ज़्यादा पाया जबकि उनका सारा जीवन जहाँ बीता,जहाँ उनकी किलकारी भी गूँजी और जहाँ साधारण युवराज को भगवान बुद्ध बनते देखा, उस भूमि के लोग आपस में ही उलझे हुए बिखर रहें हैं। नफ़रतें सर चढ़कर बोल रही,सुक़ून जैसे उनसे छीन लिया गया हो । बुद्ध में बहुत सी गुत्थियां हैं जो मोहब्बत से ही खुलेंगी और रास्ता दिखाएंगी।हो सके तो अपने अंदर झाँकना।अंदर अगर प्राणी मात्र से प्रेम दिखे तो बुद्ध को याद करना वरना सब हवा हवाई बातें हैं।इंसान से मोहब्बत हो,दर्द पर मरहम बनने की ख्वाहिश हो तब बुद्ध को याद करना।बुद्ध तुमसे कह कर गए हैं की सारा प्रकाश तुम्हारे ही अंदर है।उसे महसूस करके रौशनी पैदा करो और आगे बढ़ो।दुनिया को आगे बढ़ाओ।यही तो बुद्ध है, गौतम बुद्ध।।।
#हैशटैग #hashtag

No comments:

Post a Comment