असल में उन्हें सिखाया ही यह गया है कि अपने विरोधी का विरोध करते वक़्त सारी नँगाई को ओढ़ लो । इनको बताया गया है कि जो सँस्कार भारतीय हैं, वह ठीक नही हैं, बल्कि गन्दी ज़हनियत से बजबजाती हुई गालियाँ निकालना ही इनकी सँस्कृति है । औरत ही क्या,हर उस चीज़ पर जो इनके खिलाफ है, उसके लिए यह इतने ही गंदे हो सकते हैं असल में यह भारतीय सँस्कृति के हत्यारे हैं ।
एक महिला के ख़िलाफ़, उसकी प्रेगनेंसी के मज़ाक और उसके चरित्र पर ठहाके लगाने वाले,वही तो हैं, जो मौका पाते ही विभत्स बलात्कारी बन जाते हैं । हम अक्सर सोचते हैं कि कोई कैसे इतना नीच हो जाता है कि किसी का बलात्कार कर बैठे,तो देख लीजिए ऐसे ही लोग होते हैं यह,इन्हें पहचान लीजिये । यह हमारे घरों में बढ़िया कपड़े पहने,सोफे पर लेटे लेटे, अपनी माँ बहन के सामने हँसते खेलते,जब ऑनलाइन लकड़ियों पर गालियों की बौछार कर रहे होते हैं, तभी जान जाना चाहिए कि यह ही बलात्कारी है ।
किसी भी महिला का अपमान भारतीय सँस्कृति का अपमान है । कोई चाहे जितना चीख चीख कहे कि मैं राष्ट्रवादी हों,यदि उसके अन्दर महिलाओं के प्रति ऐसी घिनौनी भावना है, तो सौ फीसद वह राष्ट्रवादी नही राष्ट्रद्रोही है । अगर वह ट्रोल है, तो समझ लीजिए कि चंद पैसों के लिए वह समाज का क्या क्या नही बेच सकता है । जो कुछ पैसों और पद की लालच में अपनी सँस्कृति को अँधेरे में ढकेल कर गालियाँ बक्के,महिलाओं के विरुद्ध घिनौने शब्द बोले,वह इसी पद और पैसों की लालच में अपने आँगन की ईंट भी बेचने में देर नही लगाएगा ।
वक़्त तो रोज़ निकल ही रहा है, अपने घरों में नज़र रखिये,अपने दोस्तों और रिश्तेदारों पर नज़र रखिये,जानने वालों पर नज़र रखिये । इनमे से जो भी लड़कियों पर ओछी फब्तियाँ कसते दिखाई दें,लड़की चाहे इनके विरोधी ही विचार की भी क्यों ही न हो,यदि उसपर यह कोई घिनौनी बात करते हैं, जो आप आप अपनी माँ बहन के लिए नही सुन सकते,इनसे फौरन सतर्क हो जाएं । समझाने लायक हों,तो समझाइए, वरना इन्हें अपने घरों की सीढ़ियां मत चढ़ने दें,खासकर तब,जब आपके घर मे बच्चियाँ हों । जो दूर बैठी लड़की,जिसे न देखा, न जाना,न मिला,उसके लिए गन्दी गन्दी ज़ुबान इस्तेमाल कर सकता हो तो सोचिए,जो लड़की इसे सुबह शाम दिखती होगी,उसको लेकर इसके मन मे कितने घिनौने विचार चल रहे होंगे,कल्पना ही मुश्किल है ।
अपने इर्द गिर्द सोशल मीडिया पर नज़र दौड़ाए रखिये और सम्भावित अपराधियों पर नज़र रखिये । सावधानी ही बचाओ है । अपने बच्चों को सिखाइये की लड़की कोई भी हो,कितने ही विरोधी विचार की हो,कितने ही विपरीत धर्म,वर्ग,जाति की हो मगर अपनी ज़ुबान और सोच दोनों को नीचे नही गिरने देना है ।
बचा लीजिये देश को,सँस्कृति को,उन लोगों से बचा लीजिये जो इन्हें ओढ़ने का दावा तो करते हैं मगर यह भेड़िए हैं, भेड़ की खाल ओढ़े । अपने बच्चों को समझाइए की नफरत की आग में अपनी अच्छाइयों को भस्म नही किया जाता है, यहाँ तो नफरत की आग में अपनी पूरी महान सँस्कृति को भस्म करने में भीड़ आमादा है । बचिए,जितना बच सकते हैं । अपने घरों को नफरत से दूर रखकर मर्यादित आचरण निभाने की सीख दीजिये । भगवान राम हों या पैगम्बर मोहम्मद,इन्हें वह ही अपना कह सकता है, जिसके मन मे हर महिला के लिए सम्मान हो,चाहे वह कितनी ही विपरीत विचार की हो और आखरी बात,जो लोग घिनौनी बातचीत कर रहे हैं, उनसे अपने घर को बचाइए,यह आपके घरों के लिए भी ऐसे ही विचार रखते हैं, अपनी घर की रक्षा इस राक्षसी सोच से कीजिये । जो महिला का सम्मान नही कर सकता,वह दुनिया का कोई भी बड़ा से बड़ा अपराध कर सकता है, बचिए इनसे ।
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