Saturday, May 9, 2020

मां

अब क्या माँ पर भी लिखना होगा।कैसे लिखेंगे,क्या लिखेंगे।वह तकलीफ़ लिखें जो उनके पेट में पहली बार टांग मारने से उन्हें हुई थी।उस दर्द को लिखें जो हमारे पैदा होने में उन्होंने सहा था।यार यह बताओ उस एहसास को कैसे लिखें जब वह पहली बार मुझे देख दर्द के साथ मुस्कुराई थीं।अपने बड़े से हाथ में मेरा पूरा बदन लेकर कहा था आज से मैं तेरा साया हूँ।कैसे लिखूँ उन उंगलियो पर जिन्होंने पूरे बदन पर ऐसे मालिश की मैं आजभी सख्त पत्थरों से जूझने लायक बना।

उस दूध पर लिखने की सलाहियत मुझमे नहीं।उन निवालों पर क्या लिखा जाए जो बिना मेरे भूख भूख पुकारे मेरे मुँह में अनगिनत बार डाल दिए गए।मैं या कोई भी माँ पर कैसे लिखे।आप और हम सारे एहसास,जज़्बात,मोहब्बत सब लिख सकते हैं मगर माँ पर कलम खुद बच्चा हो जाती है।हाँ एक बात जो मैं हमेशा सोचता हूँ वह यह की मेरी माँ मेरे सामने दुनिया छोड़े नाकि उसके सामने मैं।मरना सभी को है मगर मैं नही चाहता एक माँ अपने बेटे के मरने का दर्द सहे।यह पीड़ा उसके जीवन की सबसे घातक पीड़ा है। अभी इरफान खान के मरना देखा और उसके कुछ दिन पहले उनकी माँ का मरना देखा,सुक़ून मिला कि उनकी माँ पहाड़ जैसे ग़म को उठाने से पहले रुखसत हो गई,वरना इरफान का न रहना,उनके दिल को रोज़ नोचता रहता और वह दर्द में कराहती रहती ।

हाँ मैं बेटा होकर उस दर्द को उठा लेना चाहता हूँ।मैं कोई अच्छा बेटा नही हूँ फिर भी मैं जब पैरों को दबा रहा होता हूँ तब ही दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर को छूने का एहसास होता है।तकलीफ़ तब होती है जब देखता हूँ कोई नौजवान माँ को नासमझ समझ कर उन्हें दुत्कारता है। माँ की इज़्ज़त का जिसके दिल में एहसास हो गया वह दूसरे को नुकसान तो नही ही पहुँचा सकता। एक बात तो सच है ही कि जिसके दिल मे मां के प्रति सच्चा सम्मान होगा,वह किसी भी दूसरी औरत या मां के प्रति कड़वाहट नही रख सकेगा । जिसके दिल में मां के लिए नरमी होगी,वह दूसरों से नफरत कर ही नही पाएगा ।

मदर्स डे पर मूसा की कैफ़ियत को समझियेगा,मूसा हमेशा कोहेतूर(पहाड़) पर बेधड़क दौड़े चले जाया करते थे। एक रोज़ दौड़ते हुए पहाड़ पर जा रहे थे की एक पत्थर की ठोकर लगी और वह मुँह के बल गिर गए । तब मूसा ने आसमान की तरफ शिकायती अंदाज़ में देखा,उधर आसमान से आवाज़ आई
"ऐ मूसा अब सम्भल कर चला करो।तुम्हारे लिए दुआ करने वाले हाथ अब नही रहे।तुम्हारी माँ खत्म हो गई,अब एहतियात रखना,सम्भल कर चलना।"
 मूसा के आँसू आ गए।सोचिये वह पैगम्बर थे।हम और आप को उस माँ की कितनी ज़रूरत है।उनकी दुआओ की कितनी दरकार है।

आखरी बात,अगर अपने बच्चे से कुछ भी बात कहते या करते हुए किसी भी माँ के दिल में ख़ौफ़ या हिचकिचाहट आ जाए तो वह बड़ा बड़ा ज़ुल्मी है। मां को संकोच नही करने देने लायक माहौल बनाइये । सोचिए भगवान राम ने अपनी सौतेली माँ के भी दिल का मान रखा था,यही तो हमारा कर्तव्य है ।माँ से मोहब्बत तो ज़रूरी है ही उनकी इज़्ज़त करना तो फ़र्ज़ है।

मां चाहे नरेंद्र मोदी को हों या राहुल गाँधी की,मां चाहे आपकी हो या हमारी,मां सिर्फ मां होती हैं । जो किसी भी मां की इज़्ज़त पर कीचड़ उछालते हैं, असल में वह कीचड़ उनके अपने ही मुँह पर पड़ रहा होता है । मदर्स डे की मुबारकबाद की दुनिया की सभी माँ सुक़ून और इज़्ज़त पा सकें और उनके हिस्से का सुक़ून और इज़्ज़त खत्म करने वाले कमज़ोर पड़ जाएँ, बिखर जाएँ....

#hashtag #हैशटैग

No comments:

Post a Comment