आज गोपाल कृष्ण गोखले का जन्मदिन है । वह गोखले जिन्होंने गाँधी को भारत समझने का रास्ता दिखाया । जिनसे गाँधी ने बहसें भी की और सीखा भी । जब गोखले डरबन में अंग्रेज़ों से गाँधी की माँग पूरी करने की खबर,गाँधी को देते हुए भरोसा दे रहे थे कि मुश्किल दूर होंगी,तब गांधी कहते कि यह बड़े झूठे हैं, कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं, इनपर भरोसा नही कर सकते । तब गोखले कहते हैं कि अंग्रेज़ वादे से नही मुकरेंगे,गांधी चुप हो जाते हैं ।
देखते ही देखते गोखले कप गलत बता, अंग्रेज़ अपने वादे से मुकर जाते हैं और इस तरह गोखले की आँखों मे वह सितारा जन्म लेता है, जो भारत की तस्वीर बदल देता है । गोखले गाँधी को भारत बुलाते हैं और राय देते हैं कि जाओ, पूरा देश घूमो,समझो और फिर कार्ययोजना तैयार करो ।
गोखले तो गाँधी के भारत मे शुरुआती सफर में ही छोड़ जाते हैं मगर उनके सिखाए रास्ते गाँधी के लिए हमेशा पक्के रास्ते बन जाते हैं । गोखले की नज़रे पारखी थीं, एक लीडर की नज़र ही तो पारखी होनी चाहिए । ऐसे लोग पहचान लेने की कला होनी चाहिए, जो सभ्यताओं को प्रभावित करें,गोखले इसमे माहिर थे ।
गोखले ने राजनीति में गर्म खाने को ठंडा करके आहिस्ता आहिस्ता खाने का हुनर दिया । भारत से लेकर इंग्लैंड तक अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाया । यही समझ लें जब दक्षिण अफ्रीका में भारतीय गांधी के नेतृत्व में संघर्षरत थे,तब गोखले की दक्षिण अफ्रीका यात्रा बहुत महत्व रखती है ।
एक तरफ अंग्रेज़ भारतीयों से चिढ़ रहे थे,वहीं दूसरी तरफ गोखले के आगमन पर पलके बिछाए बैठे थे ।।वह गोखले की शक्ति जानते थे,बस नही जानते थे कि गोखले की नज़र जिस महान शक्ति पर है, वह कौन है । गोखले के इर्द गिर्द रहे मगर गाँधी को नज़र में नही ला पाए और गोखले के गाँधी ने ब्रिटिश राज को खोखला कर दिया ।
नीचे एक तस्वीर है, सन 1912 की डरबन में गाँधी के साथियों के साथ गोखले हैं ।।यहीं गाँधी के कान में गोखले ने मंतर फूंका की अब देश की फिक्र करो,मुँह अपनी माटी की तरफ मोड़ो और मंतर ने असर किया । हमेशा चलते रहने वाला गांधी चल निकला और इसी के साथ दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनत की चिट्खन भी चल निकली ।
गोपाल कृष्ण गोखले के बहुत से ऐतिहासिक काम हैं । भाईचारे पर गम्भीर काम हैं । भारतीयों के दर्द पर मरहम रखने के किस्से भरे पड़े हैं । ढूंढकर पढ़िए ।।जन्मदिन पर याद ज़रूर कीजिये मगर जानिए की काँग्रेस के यह अग्रणी नायक कितने बड़े और जुझारू राजनीतिज्ञ थे ।
विरासत यह हैं, जिन्होंने भारत की बेड़ियाँ काटने में अपनी ज़िंदगी लगाई । जिन्होंने संघर्ष की भूमि तैयार की,जिन्होंने देश से मोहब्बत करने वाले दिलों को रोशनी दिखाई,जो खुद में एक मशाल थे,ऐसी मिसाल को याद रखिये और याद करते रहिए,जिस दिन यह यादें धुंधली होंगी उस दिन आपका वजूद भी धुंधला जाएगा । सम्पूर्ण भारत गणराज्य अपने महान सुपुत्र को नमन करता है ।
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