ज़ाहिर है दो दिन देश रँग में रँगा रहेगा।यह वोह वक़्त है जब गरीब अमीर सबके चेहरों पर रँग होगा।मैं सोचता हूँ की यह जो होली है यह इस क़दर एक जैसी है की सबको बराबर कर देती है।अमीर गरीब में रँग की गुणवत्ता को लेकर फ़र्क़ हो सकता है मगर रँगो का फ़र्क़ नही होता।वही हरा, लाल पीला उनके चेहरों को एकसा रँगता है।
मैं त्योहारों में छुपे भारत को देखता हूँ,इनके मन को टटोलता हूँ।देखिये हम रोज़ की जद्दोजहद में भी अपनी खुशियों के दिन गढ़ लेते हैं।फसलें हमारे त्यौहार तय करती हैं।मौसम उनपर असर डालते हैं।मुझे इससे ज़्यादा प्राकृतिक और क्या लगेगा की हर एक ख़ुशी प्राकृतिक की करवट बदलने पर टिकी हुई है।यह त्यौहार मौसमो के स्वागत और अलविदा की निशानी तो हैं ही साथ ही कितना कुछ समेटे हैं।
अक्सर लोग होलिका जलाने पर प्रश्न उठाते हैं।वोह यह नही सोचते की सिर्फ औरत हो जाने से गलत कामो पर पर्दा नही डाला जा सकता है।उन्हें होलिका का ग़म है मगर उस बच्चे का नही जिसे वोह आग में लेकर बैठती है।मैं इन कहानियों की सच्चाई में नही जाता बस इतना भर की जो गलत होगा वोह चाहे औरत हो या आदमी या थर्ड जेंडर,गलत तो गलत ही कहलाएगा।उसे लैंगिक लाभ नही दिया जा सकता।खैर इस पर आप हमारी जमकर आलोचना कर सकते हैं मगर मेरे लिए सब बराबर हैं मैं इनके पाप और पुण्य में लैंगिक भेद नही करता।
आज जो लोगों के बंटने और कट्टरता को बढ़ने की बात कर रहे हैं।वह देखें की क्या उनका चरित्र ऐसा है की लोग उन्हें अपनाए।आप त्योहारों में हैप्पी होली कहकर दिलों के करीब नही जा सकते।उसमे शामिल होईये।रँग की छींटे कब सिवइयों में घुल केक तैयार करने लगेंगी पता भी नही चलेगा।दूसरों के त्योहारों,पसन्द न पसन्द पर नाक भौं चढ़ाकर आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं की वोह लपक कर आपको गले लगाएगा।
मैं जब होली को देखता हूँ तो मुझे लगता है आखिर यह त्यौहार हैं जो आंदोलन की तरह सदियों से चले आ रहे हैं।इनसे जुड़ी कहानियाँ आज भी ज़िंदा हैं।यह रँगो में उस चरित्र को महसूस कीजिये जो आज ख़ुशी में सब रँगो को समेट लेना चाहता है।मैंने होली में कभी किसी को किसी भी रँग से परहेज़ करते नही देखा,बल्कि जितना ज़्यादा रँग उतनी मदमस्त होली।यानि आपमें जितने रँग होंगे वही तो त्यौहार होगा।वही तो प्रसन्नता का शीर्ष होगा।
त्योहारों में कमियां निकालने की जगह उनका हिस्सा बनकर खुद की कमियाँ दूर की जाएँ तो बेहतर है।उन खुशियों को महसूस कीजिये जो हमारी मुश्किल भरी ज़िन्दगी में ओस भरती हैं।मुस्कुरा लीजिये ताकि चेहरे पर नमी बनी रहे।रँगो की इस खूबसूरत फ़िज़ाओं में सबको मुबारकबाद।हर त्यौहार हमारा है और हर हम हर त्यौहार के हैं।मज़े कीजिये,आज से रँग है।
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