Wednesday, March 8, 2017

मशीन नही हैं हम

मुझे घर का गेंहू पिसवाना पसन्द है।सब्ज़ी लाना अच्छा लगता है।घरेलु सामान की खरीदारी में दिल लगता है।मैकेनिक के साथ मिलकर टीवी,फ्रिज,पंखा,कूलर,प्रेस वगैरह सही करवाना अच्छा लगता है।क्यारी की सफाई में तो डूब जाने का मन करता है।पौधों की कटाई छटाई और पानी से इन्हें नहलाना खूबसूरत शगल है।पडोसी से पड़ोसी का हाल जानना अच्छा लगता है।घर के बाहर झाड़ू लगाना और छत की सफाई करना भी दिल को भाता है।

जानते हैं क्यों।क्योकि यह काम हमे मशीन नहीं बनने देते हैं।ज़बरदस्त बिज़ी होने के बावजूद हम यह सब करते हैं ताकि हमे लगता रहे हम मशीन नही हैं।मशीन सुबह से शाम तक एक जैसा काम करती रहती है।जबकि हम सुबह से शाम तक सैकड़ो तरह के काम करके इंसान बनते हैं।आप सुबह ऑफिस निकल जाए तय वक़्त पर,लौट के खाना खाए रूटीन,रात में बिस्तर पर पड़ रहे,फिर अगले दिन यही सब तो दोस्त आप मशीन हो चुके हैं।

हल्के फुल्के अलग से काम कीजिये ताकि इंसान बने रहिये।हंसिए,रोइये,बोलिये,लड़िये,मिलिए सब करिये ताकि इंसान लगिए।खूब अलग अलग काम करिये।ऊपर के यह मामूली से काम थोडा सा वक़्त लेंगे और अगर थोड़े से वक़्त में आप इंसान बन रहे हों तो इसमें बुरा क्या है।यह पोस्ट पुराना है फिर भी मशीन बनने से रोकने के लिए आज भी कामका है।

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