स्वर्गलोक में नृत्य चल रहा था कि अचानक वहाँ बच्चों की लाइन डोरी आगई । छोटे छोटे बच्चे थे,किसी के हाथ मे मां की तस्वीर थी तो किसी के हाथ बाप की तस्वीर थी । यही नही एक आध बच्चों के हाथ मे तो अपने ज़मीन के उद्धारक लीडर की भी तस्वीर थी । सब चुपचाप एक सिरे से दूसरे सिरे की तरफ नन्हे नन्हे कदमों से बढ़े चले जा रहे थे ।
अचानक एक आवाज़ गूंजी की हे यमराज,यह बच्चे तुम्हे कहाँ मिल गए ,वह भी इतने सारे । यमराज बोले महाराज इतने सारे थे तभी तो आसानी से ले आए,एक आध होते तो मुश्किल होता । इनको ज़मीन पर ही क्या सुक़ून था,इसलिए महाराज आपकी शरण मे ले आए । बेचारे धरती पर अस्पतालों में तड़प रहे थे,कोई इन्हें देखने वाला नही था । इनका कोई हाल क्या लेता,न इनके जीने से मतलब और न मरने से,तो हमने सोचा चलो ऐसे नरक से इन्हें आपके पास लिए चले ।
ऊपर से तेज़ आवाज़ आई, यमराज,तुम मेरी पृथ्वी को नरक बता रहे हो । यमराज बोले महाराज कमसे कम आपतो हमे यहां आसमान में सच कह लेने दें । वह धरती नरक ही है । महाराज वहां नन्हे नन्हे बच्चों की मौत पर भी लोग अपनी पार्टी का मूड देखकर बोलते हैं । इनके धर्म खंगाले जाते हैं । इनकी जाति उछाली जाती है यही नही महाराज अगर यह गरीब वर्ग के हुए तो यही गनीमत जानिए आपकी धरती के लोग इन मरे हुए बच्चों की खाल इस्तेमाल नही करते,वरना वह भी....रहने दो यमराज,इसके आगे मत बोलो । मुझसे सुना नही जा रहा । जाओ पृथ्वी से सारे बच्चे ले आओ,इस मनहूस धरती के मनहूस लोगों की गोद सूनी करदो । यमराज बोल उठते हैं, हरगिज़ नही महाराज । यह आदेश वापिस लीजिये । लेने को तो मैं करोणों लोगों के बच्चे ले आऊँ, धरती पर रत्ती भर फर्क नही पड़ेगा,बस रोएंगे ही मगर महाराज धरती के हर टुकड़े पर आठ दस ऐसे भी लोग हैं, जिनके बच्चों को हाथ लगाया तो कहर टूट पड़ेगा । उनके बच्चों को अगर मैं ले आया तो पृथ्वी पर तांडव मच जाएगा । यह अमीर लोग हैं महाराज,आपकी सत्ता को भी लील जाएँगे ।
महाराज यमराज की चेतावनी से डरकर बच्चों को देखने लगे । इस लाइन डोरी में उन्हें हर बच्चे में वह भविष्य दिखाई दे रहा था,जो उन्होंने धरती को सोचकर बनाया था । भगवान सोच रहे थे जीवन तो इनको भी उतना ही दिया जितना सबको,मगर इनके हिस्से की ज़िंदगी इनके अपने ही खा गए । इनके अपने पृथ्वी वासी ही इनकी खुशियों को निगल गए । महाराज आँसुओं की धार बहाते हुए सोचते रहे,यह वही लोग थे जिनमें मैने प्रेम,सहिष्णुता,सेवा और त्याग भरा था । यह वही हैं, जिनमे सृष्टि की रचना के बीज रोपे थे । यह वही लोग हैं जिनको सन्तान जनने का सबसे बड़ा वरदान दिया था । यह मनहूस लोग अपने धर्म,अपनी जाति,अपनी राजनीति,अपने अपने सिर्फ अपने लिए जीवन जीते रहे । इन्हें बच्चों की मौत रुलाती नही है । इन्हें अस्पतालों में टहलती लाशें बिजली की लड़ियाँ लगती हैं । जिन्हें रोने की आवाज़ में फर्क समझ आता है की यह तो हमारे धर्म की नही है, यह तो हमारी जाति की नही है, यह हमारे परिवार की नही है ।
यमराज और महाराज दोनो को रोता देख बच्चे ठहर गए और अपने हाथों में ली हुई तस्वीर किनारे रख बोले,आप लोग रोएँ मत । हमे ज़रा भी अफ़सोस नही की हम मर गए ।बस आप नीचे धरती पर मेरे माँ बाप भाई बहन को सुरक्षित रखियेगा । हमारे लीडर्स को चैन की नींद दीजिएगा और उनके बच्चों पर हमेशा हाथ रखे रहिये की कहीं,वह भी मेरी तरह बिन माँ बाप के इतनी दूर यहाँ तक के सफर पर अकेले आ जाएं ।
हो सके तो हमे एक एक घूँट सुक़ून का पानी पिलवा दीजिये । आपकी बनाई खूबसूरत धरती हमारे लिए बदसूरत ही थी । अच्छा हुआ बुला लिया,वह ज़मीन उनके लिए है जिनके पास ताक़त है.... हम सबके लिए तो आपका साथ ही स्वर्ग है, इंसान का साथ तो नरक था....बस भगवान अगला जन्म मत दीजिएगा । दीजिएगा तो वह धरती मत दीजिएगा जहां इंसान इंसान में नफरत हो । कीड़े मकोड़े बना दीजिएगा मगर ऐसी मनहूस ज़मीन पर मानव योनि मत दीजिएगा जहाँ मानव ही मानव को खाता हो । हे महाराज हमारे पीछे धरती पर जो बच्चे रह गए हैं । जो अस्पतालों में हैं, उन्हें ठीक करदे ताकि ज़िन्दगी भर वह हमारी किस्मत देखते रहें कि हम कितने लकी थे,मनहूस सिस्टम से जल्दी ही हमारा साथ छूट गया....
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