हमने जो बो रहें हैं, हम नही तो हमारे बच्चे वह फ़सल काटेंगे । दुनिया मे कोई भी चमत्कार बबूल के बीज से आम नही निकाल सकता ।
तुम खून से सनी हुई ज़मीन अपने बच्चों को देना चाहो, तो जमकर नफरत फैलाओ और हर एक से नफरत करो । अपने बच्चों को प्रेम से भरपूर ज़मीन देना चाहो, तो खूब प्रेम और भाई चारा फैलाओ । इसके सिवा कोई रास्ता नही है ।
कल की दुनिया,देश और घर,आज हमारे हाथों से ही बन रहा है । ईश्वर ने इसका निर्माण आज हम सौंपा है । नफरत में बहक कर कल का पानी ज़हरीला करदो या प्रेम बाँटकर आने वाली नस्ल के पानी केवल पानी करदो । जैसी भी दुनिया कल देखनी है, आज उसे करके देखो,कल वह उससे कई गुना बड़ी और फैलकर सामने होगी ।
मैं केवल तुम्हारी बात कर रहा हूँ,समाज को मत देखो,वह एक दिन तुम्हारे जैसा बनकर तुममे समा जाएगा....
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