मामूली उम्र में माँ ने साथ छोड़ दिया,वह माँ जो उन्हें हर मुश्किल से बचाए बस आगे बढ़ने के ख्वाब दिखा रही थी।छोटे भाई बहनो की ज़िम्मेदारी और माँ के ख्वाब आपस में टकराकर उसे कमज़ोर करते मगर वह इनसे जूझता रहा।पैसों की तंगी से जूझती पढ़ाई और देश पर छाया गुलामी का अँधियारा उन्हें चैन से नही बैठने दे रहा था,फिर भी वह पढ़ते गए।एक वक़्त के बाद लगा की पहले खुद को इतना क़ाबिल करलें की देश उनसे फायदा उठा सके।हुआ भी यही,देश विदेश में अपने दम पर पढ़कर वह आवाम की ख़िदमत में लग गए।
देशबन्धु चितरंजनदास भी उनके कँधे से कँधे लगकर देश की आज़ादी की लड़ाई समझते रहे।सुभाष चन्द्र बोस ने भी उनसे मिलकर एक किरण उन्हें थमाई।आखिर वह महात्मा गाँधी तक जा पहुँचे और जवाहरलाल नेहरू का हाथ पकड़ कर आज़ादी की अलख जगाते हुए बंगाल में खड़े हो गए।एक ऐसा इंसान जिसके खड़े होने से बंगाल खड़ा होता था,आज ही के दिन उसके लेटने से बंगाल लेट गया था।उसके जाने पर सिसक सिसक कर बंगाल रोया था।वह ऐसी शख्सियत थे जो बंटवारे में दिलों को जोड़ते रहे।उनका दिल पूरे भारत के दिल को जोड़ रहा था।जो इंसान और इंसान के बीच मोहब्बत और इंसानियत के बीज ही बोता रहा।
जब मुल्क़ आज़ाद हुआ तो उन्हें मंत्रालय में जगह दी जाने लगी।बड़ी विनम्रता से उन्होंने मना कर दिया और कहा मुझे मेरे देश की जनता की सेवा हमारे अपने क्षेत्र से करने दें।वह पढ़ाने में लग गए।जो उनका ख्वाब था की यह देश अपने पाँव पर खड़ा होकर सीना तानकर चले।ख़ामोशी से बंगाल में इतना बड़ा स्वतन्त्रता सेनानी पढ़ाने चला गया मगर गाँधी तो ज़िंदा थे।
उन्हें एक एक इंसान के क़द और अहमियत का बड़ा अंदाज़ा था।बंगाल की उथल पुथल से पहले ही नेहरू को भेजकर उन्हें बंगाल का मुख्यमंत्री बनवाने पर राज़ी कर लिया।इस तरह बिधान चन्द्र राय का वजूद इतिहास में दर्ज हुआ।
वह ऐसी शख्सियत जिसका दिल बेहद विशाल,मिजाज़ नरम और ख़िदमत का अटूट जज़्बा।ताज्जुब है प्रकृति ने उन्हें आज ही के दिन पैदा किया और आज ही के दिन अपने पास बुला लिया।एक ऐसा इंसान जिसका होना इस मुल्क़ के लिए ज़रूरी था।बिधान चन्द्र राय को पढ़ा जाना चाहिए।काँग्रेस के इस महान नेता ने बंगाल को बहुत गहरी नीव दी साथ ही देश को शिक्षा और स्वास्थ्य में अमिट पहचान।वह व्यक्ति जो आज़ादी की लड़ाई भी लड़ता और रात तक लोगों के दर्द भी दूर करता।मैं बार बार कहता हूँ यह देश बिधान चन्द्र राय जैसे मोहब्बत से भरे हुए इंसानों के ख़ून पसीने की नीव पर खड़ा हुआ है।हो सके तो भारत रत्न बिधान बाबू को उनके जन्मदिन और पुण्यतिथि,जो आज ही हैं थोड़ा सा याद करलें।इस देश की बुनियाद और फ़ख्र दोनों ही हैं बिधान चन्द्र राय और उनके जैसे समाज सेवी,राजनीतिज्ञ,स्वतन्त्रता सेनानी।।अपने काम से मुल्क़ की धड़कन सुधारने वाले बिधान बाबू की याद में ही आज भारत में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
बंगाल, जिसे आज बिधान बाबू की ज़रूरत है । जो टूटते दिलों को जोड़ने खड़ा हो । गाँधी की छाँव से निकला यह बीज और इनका किरदार ही ,टूटते दो दिलों को जोड़ सकता है...नफरत को मिटाकर प्रेम का झंडा बिधान बाबू जैसा चरित्र ही।लगा पाएगा ।आजकी ज़रूरत हैं बिधान बाबू ।
No comments:
Post a Comment