Wednesday, August 2, 2017

तरगारे

गुलाबी होंट पर घुंघराले बाल, दूध से सफ़ेद गाल,इकहरा बदन,नाज़ुक ऊँगलियां और मखमली हथेली,चेहरों पर बिखरी मुस्कान,आवाज़ में झंकार,बदन में लचक जिसपर अच्छे अच्छे फिसल जाए।उन्हें प्यार से लखनवी लोग तरगारे कहते।जैसे रेशमी कपड़े पर तारे टाँके हों।गुजरात से खास इन्हें लखनऊ की चौखट पर लाया जाता।इतनी खूबसूरती को लखनऊ लाना भी किसी कोहिनूर की हिफाज़त से कम न था।यह पारसी थियेटर का अहम हिस्सा होते थे।

इनकी उम्र 13 से 18 होती थी।बताने वाले तो कहते हैं की इन्हें नहाता हुआ देखने के लिए लोग दरवाज़ों की दराज़ो में आँखे लगाए रखते थे।शीशे से जिस्म में ख्वाहिशों का अक़्स देखने वाले एक झलक के लिए टूट पड़ते थे।गुजराती खूबसूरत नौजवानो को आपस में भी साथ लेटने की सख्त मनाही थी।इनके दमकते जिस्म को सन्दल से महकाया जाता था।उनकी इज़्ज़त की हिफाज़त एक बड़ा मसला थी।क्या अजब फ्रेंड का ज़ुल्म था खूबसूरती पर।यह लड़के थियेटर में फ़ीमेल आर्टिस्ट की कमी को भरते थे।इनमें धीरे धीरे थियेटर की ऐसी बारीकियाँ पिरोई जाती थीं की इनके जिस्म के जोड़ जोड़ से अभिनय टपकता था।

खैर सबसे खूबसूरत तरगारे को रिक्शा पर बिठाकर लखनऊ भर में घुमाया जाता था।उसकी खूबसूरती पर लखनवी मोहब्बत के दीवाने शाम को पारसी थियेटर में अपना सब कुछ लूटा देंने को बेताब हो जाते थे।वैसे भी लखनऊ ने हर दौर में खूबसूरती और फ़न को सर आँखों पर रखा है।इन गुजराती लड़को को लखनऊ में काफी इज़्ज़त,दौलत,काम और काम और हाँ काम मिल जाता था।उनकी कशिश हर एक को कल भी खींचती थी और आज के क्या कहने।ज़ेवर से लदे जब वह पालकी से उतरते तो अच्छे अच्छे बहक जाते,वह बहकाने का जादू आज भी सर चढ़कर बोल रहा है।उस दौर में बड़े दिलचस्प लोग थे,बड़े दिलचस्प तरगारे और दिलों में हलचल पैदा करने वाले उनके क़िस्से।लखनऊ की यह ज़मीन लम्बे वक़्त तक तरगारो की चहलकदमी को ज़िंदा रखेगी।यक़ीन न हो तो पुराने खण्डहरों का रुख कीजिये।

यह अभी आपको छेड़कर पूछेंगे की क्यों यार,अब क्यों नही आते तुम हमे देखने।तुम्हारे पुरखे हम पर मरते थे।हमारे मरते तुम भी मर गए।चलो उठो देखो आज शाम का शो बड़ा लाजवाब है।यक़ीन मानो आजके शो में तरगारो का शहज़ादा आया है।कसम से देख के तुम आँख न फेर सकोगे।चलो उठो और आ जाओ।ज़्यादा मगरूरियत मत दिखाओ।हमें देख के तुम्हारे मीर भी डोल गए थे,तभी तख्त पर औंधे मुँह गिरे से मीर बस यही कह रहे थे..... मीर क्या पूछिये,बीमार हुए जिसके सबब,
उसी अत्तार के लड़के,से दवा लेते हैं।।

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