मेधा माँग क्या रहीं हैं?सरकार की किडनी या सरकार का दिल-जिगर या सरकार का ख़ून या सरकार को ही।मेधा भूखी प्यासी रोज़ ढलती क्यों जा रहीं हैं?अपने लिए,अपने खानदान के लिए या अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए।गौर कीजियेगा की मेधा कर क्या रहीं हैं।क्यों कर रहीं हैं।
आपको लगता है अनशन बड़ा आसान है, ज़रा तीन वक़्त भूखे रहिएगा,चौबीस घण्टे प्यासे रहिये तब देखिये ज़बान के साथ दिमाग कितना चिड़चिड़ा हो जाता है।इसपर भी वह शाँत सिर्फ एक ही तो माँग कर रहीं की सरदार सरोवर बाँध में जो विस्थापित हो रहें उन्हें एक अदद घर दे दो,सुक़ून दे दो।सब कुछ छीनने वाली सरकार यह मामूली सी चीज़ें भी नही देना चाहती।
अभी पूरी बेशर्मी से बाँध का उद्घाटन होगा और पूरा लाव लश्कर बादशाह के गुणगान में लग जाएगा।इस शोर में उनकी आवाज़ें सरदार सरोवर बाँध में ही दब जाएँगी जिनकी ज़िन्दगी पर पैर रखकर इसे खड़ा किया गया है।एक बार खुद में झाँकियेगा की बालिश्त भर ज़मीन या एक नाली निकलने को लेकर आप सगे भाइयों के ख़ून के प्यासे हो जाते हैं और वहाँ हज़ार लोग सब गवा देने के बाद अहिँसा से खड़े हैं और मेधा उनके लिए भूखी प्यासी तिल तिल घिसट रहीं हैं।
हमे यह भी पता है की राजनैतिक प्रेम के कारण आपको सरकार में गलती नही नज़र आएगी।वह एक बार कहेंगे यहाँ सब शाँति है और बार बार गाएंगे की यहाँ सब शाँति शाँति है।मगर इस शाँति गीत में बहुतों के आँसू मिलकर इसे खट्टा ज़रूर कर देंगे।विकास करना कोई बुरी चीज़ नही,विस्थापन भी होता है मगर क्याउन्हें आप वह भी नही देना चाहते जो बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट में बोलकर आए थे।उन्हें एक छत और मुवावजा देने में अगर आपकी सरकार की आँखे बाहर आई जा रहीं हैं तो यह बेशर्मी ही है जो सरपर चढ़ गई है।
मेधा को कल जबरन आप खींच ले गए,हमे पता है आप उन्हें दूसरी ईरोम बना देना चाहते हैं।ईरोम के पीछे से मौकापरस्त भीड़ भले खिसक गई हो फिर भी वह जूझती रहीं।मेधा के साथ एक बड़ा जनसमूह है।मेधा पाटकर अंत तक खड़ी रहेंगी,टूटेंगे तो हम।कभी अपने स्वार्थ से टूटेंगे तो कभी एक बादशाह के लिए प्रजा बनकर टूटेंगे।मगर मेधा पाटकर जब तक रहेंगी उन घरों के लिए एक उम्मीद रहेगी जो मिट रहें हैं।जिनके सामने दीवारें क्या भविष्य के ख्वाब भी डूब रहें हैं।
मैं बार बार कहता हूँ की अगर राजनीती,संगठन,धर्म,जाति, वर्ग,सोच के इतर मानवता ज़रा सी रह गई हो तो मेधा पाटकर के लिए आवाज़ उठाइये।क्योंकि अगर यह शांत हो गईं तो हमारी चीखें भी फुसफुसाहट ही लगेंगी।उनपर सरकारें हँसना भी व्यर्थ समझेंगी।यह लड़ाई एक अदद सुक़ून की है, हो सके तो उन लोगों की आवाज़ बनिए वरना ज़िन्दगी भर सुरीली आवाज़ के साथ भी गूंगे ही रहिएगा।मेधा पाटकर आपकी सेहत के लिए प्रार्थना अगर आप स्वस्थ रहेंगी तो हम स्वस्थ रहेंगे,हम रहेंगे तो समाज रहेगा,समाज रहेगा तो भारत रहेगा और यह वादा की हम इस भारत को कमज़ोर नही होने देंगे।भारत आपके साथ है मेधा ताई।सैल्यूट।।।
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