बिहार में बाढ़ है।तस्वीरें लगाने वाली नही हैं।शब्दों पर वक़्त बर्बाद करने से कोई फायदा नही,बाढ़ से सब कुछ डूबता साफ़ नज़र आ रहा है।हो सके तो खुद मदद कीजिये,लोगों से करवाइये इन सबसे ज़्यादा सरकार पर दबाओ बनाइये की बाढ़ में फंसी जिंदगियां अपने परिवार के जैसी महसूस करें और मदद के लिए आगे आए।सरकार ही है जिसके पास सिस्टम और रिसोर्सेज़ दोनों हैं, बस नियत चाहिए।आज बाढ़ से हर दरकती दीवार को सहारा दे दीजिये भले कल से फिर लड़ना शुरू कर लीजियेगा।
यूपी,असम और दूसरे राज्य वाले अपनी चौखट पर उफान मारते पानी की तरफ भी नज़र डाल लें,बहुत कुछ डूब गया है और काफी कुछ डूबने वाला है।
सरकार तो इस क़दर बेहिस है की ज़रूरत के सामान की लिस्ट भी जारी नही करती,बस मुँह फाड़कर पैकेज का ऐलान होता है, जिसका काफी पर्सेंट सफ़ेद ही सफ़ेद रहकर इस जेब से उस जेब में पहुँचता है, बस परेशान लोग अपनी तबाही की बोली गीले अख़बार में पढ़कर मरते रहते हैं।आप से अपील की कोई झण्डा,बैनर या संगठन या पार्टी को मत देखिये,जहाँ कहीं भी किसी ने बाढ़ प्रभावितों के लिए राहत सामग्री के कैम्प लगाएं हैं वहाँ नीचे दी गई चीज़ों को पहुँचा दीजिये।अगर आप खुद बाढ़ प्रभावित इलाको में जा नही सकते,तो इन संस्थाओं पर भरोसा कीजिये।यही भरोसा तो तोड़ा गया है, हर एक पर ज़बरदस्ती शक पैदा किया गया है।उठिये और जो हो सके वह कीजिये...
कॉटन,डिटॉल,पट्टी
साबुन,टूथपेस्ट,ब्रश,ओडोमोस्,केरोसिन ऑयल,
तिरपाल,प्लास्टिक शीट्स
कपड़े सब तरह के,चादरें,
ड्राई फ़ूड,ब्रेड,बिस्किट्स वगैरह
चावल,दालें,चने,मोमबत्ती या रौशनी के दूसरे इंतेज़ाम,रस्सी,बर्तन या जो भी और ज़रूरत का सामान महसूस हो,इन कैम्प तक पहुँचा दीजिये।अगर डॉक्टर हैं तो तीन या चार के समूह में इनसे सम्पर्क करके कैप्म कीजिये।डॉक्टर नही भी हैं तो लोगों में पहुँचकर उनकी ख़िदमत कीजिये,उनके ज़ख्मो पर मरहम पट्टी कीजिये।
यह कठिन वक़्त हम सबको मिलकर ही काटना होगा।जहाँ आपको कैम्प या कोई संगठन न दिखाई दे,हमे बताइये।ख़ुदाई खिदमतगार दूसरे बहुत से संगठनो के साथ मिलकर ख़िदमत में लगा हुआ है।आप मदद का हाथ बढ़ाइये।बिहार समेत कई राज्यों के डूबता लोगों को हमारी ज़रूरत है।उनके साथ खड़े होईये,यही देशप्रेम,मानवता,संवेदना,समर्पण,त्याग,धैर्य सब कुछ यही है।हर साँस के साथ साँस हो हमारी.....
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