स्वर्ग में दरबार लगा हुआ था।सारे देवता आराम कर रहे थे की अचानक बच्चों की पूरी एक लाइनडोरी स्वर्ग में प्रवेश करती है।इतने बच्चों को एक साथ कतारबद्ध देख देवी और देवता मुस्कुराते तो हैं मगर सवालिया नज़र से यमराज को देखते हैं।यमराज उनके सवालिया मूड को भाँप कर कहते हैं की इस साल स्वर्ग की परेड में इक्यावन लाइन लगनी थी और हर लाइन में इक्यावन इक्यावन बच्चों को खड़ा करना था।
देवियों का कहना था की परेड में बच्चे बड़े खूबसूरत लगते हैं, जब सब तरह के देवता,भगवान,पैगम्बर यहाँ आएं तो बच्चों के पाँव की ध्वनि से पूरा स्वर्ग गूँज उठे।जब स्वर्ग के निर्माण पर झण्डा फहराया जाए और झण्डे की डोर ब्रह्मा के हाथ में हो और सज्जाद नीचे थाल लिए खड़ें हों तब यह सब बच्चे एक ध्वनि में स्तुतिगान करें।यह मनोरम दृश्य स्वर्ग को और खूबसूरत बना देगा।नरक के लोग इन आवाज़ों को सुनकर और बच्चों की परेड से उपजी तरंगो से ललचा के रह जाएँगे महाराज।
कल तक सारी तैयारी हो गई थी महाराज।यह भला मानिये की सीरिया और अरब के रेगिस्तान से ही कम से कम सैतालीस लाइन पूरी हो गईं,फिर पाकिस्तान से तीन खेप बच्चों की आ गई।कुल मिलाकर कल परसों तक पचास लाइन और बीस बच्चे हो गए थे,इक्यावन के लिए इकत्तीस और चाहिए थे।तो यह भी कल इंतेज़ाम हो गया।भारत से लाएँ हैं।यह सब बड़े होते तो अधिकतर नरक ही जाते महाराज,हमने इन सबो पर उपकार ही किया है।महाराज अब पूरी इक्यावन लाइन इक्यावन इक्यावन बच्चों की बन गईं हैं।जब यह एक साथ हमारे झण्डे को सैल्यूट करेंगे तो यह मनोरम दृश्य देवियों को भा जाएगा महाराज।
देखिये हमने तो धरती के हर हिस्से से बच्चे लाकर इकट्ठे कर दिए।महाराज आप खुद देखिये,यह सब एक जैसे हैं, एक जैसे मुस्कुरा रहे हैं, शरारते भी एक जैसी हैं।इतनी समानता तो आकाश से पाताल तक कहीं की परेड में नही होगी महाराज।स्वर्ग में बैठे सभी लहालोट हो रहे थे की धरती से आती कुछ आवाज़ों ने उनके इतने बेहतरीन आयोजन का मज़ा किरकिरा कर दिया।धरती से कोई औरत आसमान की ओर देख सिसक सिसक कह रही थी,मेरा बच्चा,हाय मेरा बच्चा....
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