मुझे नही पता,मैं जानना चाहता हूँ क्या वाक़ई पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्म आया है जिसने शासन सत्ता न सम्भाली हो।या अपने उद्भव के शीर्ष पर सत्ता को न रखा हो।या बिना शासन के फैला फला फूला हो।
देखिये हर लड़ाई का एक दायरा धर्म की शॉल में आकर सिमटता ही है।दुनिया में बहुत सी मशहूर लड़ाई की कोख में धर्म ही तो छिपा हुआ था।जिसे बचाने या बढ़ाने के लिए युद्ध होते रहे।
धर्म के एक आध्यात्मिक हिस्से को हटा दें तो दूसरा हिस्सा शासन ही तो है।उसके लोग जैसे ही आध्यात्म की चारपाई से पाँव समेटते हैं, खुद को जँग के मैदान में खड़े पाते हैं।जहाँ लड़ना,जूझना,जीतना पड़ता है।वरना धर्म जँग के इसी मैदान में दूसरे धर्म के सामने सिसक सिसक कर कमज़ोर हो जाएगा।
जीतने हारने का यह चक्र तब तक चलता रहेगा जब तक पृथ्वी घूमती रहेगी।मेरी बात इतनी सी सुन ले की यह जो साँसे मिली हुई बोरा भर वज़न के बदन में गूँथी ज़िन्दगी है, यही सब कुछ है।जो होना है इसी में होना है।इस ज़िन्दगी में चाहे बादशाह बन लो चाहे गुलाम।बाद्शाह का मतलब सिर्फ सर के मुकुट से नही है बल्कि उस ज़िन्दगी से है जो कभी सर झुकाकर गुलाम नही बनेगी।हिम्मत करके हर उसको संगठित होना चाहिए जिसको लगता है उसपर दूसरे ज़ुल्म कर रहे हैं।उस वक़्त तक विरोध कीजिये जब तक या तो ज़ुल्मी खत्म न हो जाए या आप खुद।
धर्म के किसी भी रूप को ढोइये मगर ईमानदारी से,धर्म में बहुत कुछ छिपा है।
पन्ने पलट कर देखिये की धर्म को हमेशा सत्ता की ज़रूरत पड़ती रही है।इसलिए सियासी समझ को तवज्जो दीजिये।विज्ञान से ताक़त लीजिये।दोस्त दुश्मन पहचानने में कम वक़्त लीजिये।बहुत दूर तक देखने की दिमाग में क्षमता पैदा कीजिये और अपने लिए उस लीडर को चुनिए जो आपको नाज़ुक मौके पर पैर समेटने की सीख दे पाए और उस दिन के लिए हिम्मत पैदा कर पाए,जब आप हक़ के लिए ज़िन्दगी मौत से लड़ रहें हों।
मेरी बात हर धर्म के लिए है।धर्म से शासन हासिल करना और चलाना सीखिये।यह केवल माध्यम भर है।जिसका शासन होगा,उसके यहाँ खुशहाली होगी।वह खुशहाली उसके ईश्वर को ही तो मज़बूत करेगी।सत्ता के लिए संघर्ष करो,आज नही तो कल मिलेगी वरना दूसरा रास्ता है यह धर्म की चादर को तहा कर बक्से में डाल दो और सिर्फ इंसानियत का लबादा ओढ़ निकल जाओ,नफे-नुकसान से बहुत दूर,सिर्फ मोहब्बत के लिए।जिसमे किसी की भी जीत हार की न ख़ुशी हो न ग़म हो,हो तो सिर्फ सेवा,सेवा और सेवा...जो बेहद कठिन तो है मगर मुमकिन है।
No comments:
Post a Comment