सर पर कांटों का ताज और जिस्म सूली पर।आखों से कतरा कतरा बहता खून और जबान से लोगों को माफ़ करते हुए लफ्ज़ ।जिसनें ताउम्र हरी घास का तिनका नही तोङा।ज़मीन पर पाँव रखकर उसकी गर्मी खुद में उतारकर वोह कुछ हड्डियाँ मुस्कुराती रही।पता था की कोई अपना ही उनके ख़ून का सौदा करेगा,फिर भी उसे अपनी महफ़िल में रुस्वा न किया।नँगे बदन जब अवाम का लीडर क्रूस खींचता हुआ काँटों पर जा रहा था तो उसकी नज़र झुकी नही थी।लोगो की भरी हुई आँखों में दर्द तो था मगर हिम्मत नही थी उसे थाम लें।वोह ख़ून से लथपथ सिर्फ इनकी माफ़ी की दुआएँ करता हुआ बढ़ा जा रहा था।वह यकीनन मसीह हैं ।मेरे ईसा हैं ।
इतने हस्सास की उनका रत्ती भर भी मुझमें आ जाए तो मै सारा दर्द सह लू ।इंसान बन जाऊँ वही इंसान जो दर्द को महसूस कर सके ,जो दर्द दूर कर सके।जो इंसान में फर्क ना करे।मै पूरे दावे से कहूंगा की इस पूरी कायनात में मेरे ईसा जैसा दिल किसी का नहीं ।रेत हो या घास या जंगल या पहाड़ आज भी उनकी खासियत ज़बानों पर है।फेस्टिवल तो खूब सेलिब्रेट होंगे मगर इनमे क्या ईसा होंगे।करोणों की भीड़ में मेरे ईसा का दिल होगा जो हर मज़लूम के लिए तड़पे।क्रिसमस ट्री के कंगूरों की चमक में मेरे ईसा के दिल की रौशनी होगी जो मायूस आँखों के आँसू सुखाकर मुस्कान भर दे।
मैं कह सकता हूँ जहाँ जहाँ दिल मासूम,मोहब्बत और ख़िदमत होगी वहाँ मेरे ईसा सफेद चादर ओढ़े भेड़ के संग मुस्कुराते हुए खड़े मिलेंगे।जो इंसानों पर सख्ती करेगा,वहाँ मेरे ईसा रोते हुए उसकी नादानी को दूर करने की दुआ करेंगे।मेरे ईसा मेरे इर्द गिर्द हमेशा रहते हैं।जब जब मै कमज़ोर हुआ और दिल मायूस हुआ मेरे ईसा ने मुझे पहाड़ जैसा मजबूत किया मगर मोम जैसी नर्मी के साथ। ईसा नें मुझें हमेशा अपना दिल मासूम करने की सलाह दी।जिसपर अमल ही ईसा के नज़दीक़ पहुँचना है।आज रौशनी,संगीत और केक में ईसा को खूब याद किया जाएगा बस एक बार अपने दिल के किवाड़ भी नरमी से खोल दीजियेगा ताकि ईसा उसमे दाखिल हो सकें और तब तक रह सकें जब तक अंदर मोहब्बत रहे...
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