Friday, December 22, 2017

बीएल जोशी

"अब क्या लड़के की जान ही ले लोगे"
यह लफ़्ज़ कानों में हमेशा गूँजते रहे।यह उनके थे जिनको कभी दूर से देखते थे मगर उनकी ज़बान बनने का जब मौका मिला तो ऐसी हमदर्दी की उम्मीद नही थी।मगर उनकी हद दर्जे कड़क मीठी आवाज़ ने बहुत कुछ आसान कर दिया।
यूपी के गवर्नर बी एल जोशी थे,जिनके बेहद करीब रहकर देखा था की वह ज़िन्दगी कैसी होती है जो कभी बचपन में मोटी लाल बोरा को देख दिमाग में कौंधी थी।

आज जब बीएल जोशी नही रहें हैं तो कितना कुछ याद आ रहा।मेरी ज़िन्दगी के उन पहले अहम् लोग जो ख़ामोशी से आए और बिना हलचल किये सब कुछ बदल कर चले गए।मेरे सामने शायर वसीम बरेलवी का उनपर तंज और ऊपर से जोशी साहब का मुस्कुराता हुआ अंदाज़,अभी भी याद है।

हमने अपने दरमिया भले पर्दे न रखे हों,मगर अपने चारो ओर पर्दे ज़रूर डाल रखे थे,जो आज दफ़न हो गए।गवर्नर हॉउस की सफ़ेद दीवारों में बेलौस मोहब्बत से भरे,ऊँची नाक के साथ झनकती आवाज़ के मालिक जोशी साहब नही रहे,यह कल से सुन रहे हैं।यक़ीन नही होता,फिर यक़ीन हो भी रहा।जब अब अपने पास उन्हें पाते हैं।अब सब छोड़कर,सारा लिहाज़ किनारे रखकर,सारी नफासत नज़ाकत और उन दीवारों के ऊँचे कानून को लाँघकर अब हम साथ चाय पी सकते हैं।आइये बीएल जोशी साहब,दुनिया आपको नमन करेगी और हम आपको अल्फ़ाज़ देंगे,आप गुनगुनाते रहिये,यहीं...

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