Friday, December 29, 2017

अजीब शय

वह अजीब शय थीं।उसने इंसान को इंसान से तो डराया ही।उसे जानवर,कीड़ो मकौड़ों से भी डराया।जब उसका बस नही चला तो उसने उन्हें पेड़ो से डराया।फिर हवाओं से डराया।फिर नदियों से डराया।फिर आग से डराया।अब तो इंसानों का ही एक बड़ा तबका ग़ुलाम बन चुका था उस शय का,उसने अंतिम अस्त्र चला और उसे ग्रहों से भी डरा दिया।

जाओ अब साल दर साल किस किस डर को खत्म करोगे,वह शय कभी न खत्म होने वाले वक़्त के लिए तुम पर हुक़ूमत कर रही और तुम्हे इसका एहसास भी नही।कभी गौर करना अगर इतने डर के बावजूद दिमाग काम करे,की वह कौन सी शय है जिसने तुम्हे शनि,ब्रहस्पति जैसे ग्रहों के फेर में ऐसा उलझाया की तुम पृथ्वी के लिए कीड़ा बन गए और वह मालिक।जो नही बने गुलाम वह प्रोसेस में हैं,देखो कब तक

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