ज़ाहिर है जो हो रहा वह बुरा है, बेहद बुरा।हालात तकलीफ़देह इसलिए नही है की किसी को ज़िंदा जला दिया जा रहा या पीट पीट कर मार डाला जा रहा।हालात सिर्फ इसलिए तकलीफ़देह हैं की बहुत से लोगों को यह अब सही लगने लगा है।मैं इनसे न बात करना चाहता हूँ न ही यह मेरे तवज्जे के लायक लोग हैं।क्योंकि यह सब इंसानियत से ख़ारिज भीड़ भर हैं।मेरी फ़िक्र उनके लिए है जो ऐसी घटनाओ पर विचलित हो जाते हैं।जो कल से यह वीडियो देख नींद को कोसो मीलो दूर दौड़ा आए हैं।वह लोग जिनको किसी की भी हत्या तक़लीफ़ देती है।मेरी फ़िक्र उनके लिए है।
आप सब लोग खुद को मज़बूत रखिये और कभी भी किसी भी परिस्थिति में अपने मन को हिँसा के विरुद्ध हिँसा के लिए मत तैयार होने दीजियेगा।आदर्श स्थिति कहती है की ऐसे गन्दी जहनियत के लोगों को भी माफ़ कर दिया जाए मगर हम सब इंसान ही तो हैं।हम थोड़ा यह समझे की आखिर वीडियो बनाकर ही घटना को क्यों अंजाम दिया जा रहा,ताकि ज़्यादा से ज़्यादा दहशत फैले।यही काम तो आइसिस भी करता था।ताकि वह दो के सर काटे और दो करोण लोग उसका वीडियो देख आग बबूल होकर रिएक्ट करें या दहशत में उसके सामने सर झुका लें।मैं फिर कह रहा यह एक संगठित अपराध है, इसलिए हमारी तरफ से समझदारी की और ज़्यादा ज़रूरत है।
हम सब एक सी सोच वाले मिलकर साथ आएँ।अपने बीच इस नफ़रत से उपजी दूसरी नफ़रत को बढ़ने से रोकें।नए बच्चों को इसके रिएक्शन से बचाएँ।मुझे तक़लीफ़ है जब मैं इस वीडियो को देखने वालों की आँख में उबला गुस्सा देखता हूँ।हम सबको इसे काबू करना होगा।हम कुछ झुण्ड भर इंसानों जैसे गिरोह को खूँखार जानवर बनते देख रहें हैं, यह हमारी ज़िन्दगी का बुरा दौर है।अब हम सबको अपनी प्राथमिकताएं तय करके आपसी प्रेम के लिए ही केवल काम करना होगा,भले ही वह दो चार लोग हों।
यह जितनी नफ़रत फैलाएँ ज़माने में उससे ज़्यादा मोहब्बत घोल दें हवा में,किसी न किसी को आखरी में झुकना ही होगा।हम मोहब्बत करने वाले लोग,नफ़रत को न दिल में आने देंगे और न यूँ सामने नाचने देंगे,उसे खत्म ही होना होगा दोस्त।
डरो मत,गुस्सा मत हो,विचलित मत हो,धैर्य रखो,प्रेम नफ़रत का दम घोट देगा।यह सिर्फ बातें नही हैं, दिल को तैयार करें बस...
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