मच्छरों ने आपातकालीन मीटिंग बुलाई । नौजवान हों या बूढ़े,हर लिंग,हर वज़न, हर किस्म के मच्छर इकट्ठे हुए । मच्छरों की लीडर ने ललकारते हुए कहा कि हमारे बीच कौन नमक हराम पैदा हो गया है, जो खाने की थाली में ही छेद कर रहा है ।
लीडर तो बूढ़ा मच्छर था,वह तमतमा कर लाल हो रहा था । उसने बोलना जारी रखा और कहा ,हमारे बीच कोई डेंगू मच्छर आ गया है, जो पूरी प्रजाति को बदनाम कर रहा है । अरे हम लोग भी इंसान का खून पीते हैं, मगर मारते तो नही हैं, इंसान को मारने की ज़िम्मेदारी हमने इंसान पर ही छोड़ रखी है । यह डेंगू,हमारी संस्कृति और विचारधारा के विरुद्ध है, इसे बांध कर ऊंचे तख्त पर लाओ ।
कुछ मच्छरों ने एक सफेद धारी दार थोड़े तन्दरुस्त मच्छर को पकड़ कर,रस्सी से जकड़ कर ऊंचाई पर ले जाने लगे । डेंगू मच्छर गिड़गिड़ाया,लड़खड़ाया और बोला,मालिक, मैं तो ऊँचाई पर चढ़ नही सकता और यह जो ज़हर है, आपको पता है हमारा अपना नही है । हम भला क्यों इंसान को मारेंगे । हमने तो एक दिन दो इंसानों को किसी बात पर लड़ते देखा,मैं बहुत भूखा था,मेरे देखते देखते दोनो के झगड़े में कहां से सैकड़ो की भीड़ आ गई,मैं बहुत खुश था कि चलो,भूख मिटेगी । मगर उस भीड़ ने अपने जैसे ही एक इंसान को कुचल कुचल कर मार डाला । पूरी ज़मीन पर खून बिखरा था,भीड़ भाग चुकी थी । उस रात मैं बहुत रोया,की बताओ,इंसान ने मेरा खाना सड़क पर फेंक दिया मगर मुझे खाने नही दिया । खून सड़क पर बह गया मगर सूंखे होंठ तक नही आया ।
मैं बिलबिला रहा था कि तभी उस खून पर कुछ दूसरे जानवर झपट पड़े,मैं उन जानवरो पर झपट पड़ा और शायद भीड़ का वह ज़हर तमाम बदन से होता हुआ मुझमें आ गया । मैं उतना ही ज़हरीला हो गया,मुझे मार डालिये,मैं पूरी प्रजाति पर कलंक हूँ ।
सब मच्छर रोने लगे,लीडर बोला,जाओ और कहीं छिपकर बैठ जाओ । तुम्हे हम मार नही सकते,इंसान नही हैं कि इंसान को ही मार दें । तुम बेफिक्र रहो, यह लाखो मच्छर नाराज़ ज़रूर हैं मगर तुम्हे अकेला पाकर भीड़ बनकर मारेंगे भी नही । हममे नैतिकता है, हम सब तुम्हे खून लेकर देंगे,बस अब तुम इंसान को कट काटना,अगर वह मर गया,तो हम जैसे लाखों जीवों के खाने की थाल खत्म हो जाएगी । इंसान नही जानता कि वह ज़रूरत है हमारी,उसे आपस मे मरना नही चाहिए,उसकी सद्बुद्धि की दुआएँ.... और भिनभिनाहट के साथ आसमान एकदम से काला हुआ और फिर साफ़, फिर कोई आवाज़ आई चट से,देखा इंसान के हाथ मे एक मच्छर मरा हुआ था और वह हाथ धोने बढ़ गया...
No comments:
Post a Comment