Tuesday, October 1, 2019

जन्म की पूर्व संध्या

कल जब वह पैदा होगा,कुछ लोग जिनकी बपौती है, वह अधिकार स्वरूप उसपर दावा ठोकेंगे । कल ही वह भी उसके हाथ बेशर्मी से खींचकर अपने सर पर रख कर आशीर्वाद लेंगे,जिनके दिल मे उससे नफरत है । कल वह जन्म लेगा जिसके जनमने से पुतलीबाई संसार में जानी गई,कल वह जन्म लेगा, जिसके धरती पर पाँव रखने से करमचंद गाँधी सदियों याद किये जाएँगे । कल वही तो जन्मेगा,जिसके जन्म ने उसके मां बाप भाई बहन  पत्नी पुत्र सबके नाम दुनिया के ज़बान पर याद करवा दिए । एक ऐसा दीपक जिसने कुल को तो मशहूर किया,साथ ही धरती के उस हिस्से को भी मशहूर किया,जो वक़्त के कोहरे में कहीं छिप गया था ।

चाहे जितनी उससे नफरत कर लो या चाहे जितना उससे प्रेम करलो,दोनों ही स्थितियों में तुम दोनों उसके नज़दीक़ बराबर ही होते । दुश्मन का दोस्त और दोस्त का दोस्त,शिष्यों के गुरु और गुरुओं का गुरु,कुछ भी आसमान से लेकर नही आया था । किसी जंगल या पहाड़ पर लोगों से हटकर नही गया,बल्कि लोगों में रहकर,गलतियाँ करके,उन्हें सुधारकर उसने खुदको तपा कर,पिघला कर,चोट देकर गढ़ा था। इस धरती का ऐसा ज़ेवर,जो खुद ही धातु था,खुद ही निर्माता था और खुद ही सही गले का हार बनकर छजता था ।

कल जब वह जन्मेगा,दोस्त दुश्मन सब उसको खींचेंगे की यह मेरा है । नफरत करने वाले भी उसे देखकर खुद के दिल को ठंडक देंगे । हर एक दावा ठोकेगा की मोहन मेरा है । मोहन भला कब किसी एक का है ।

जो दर्द से तड़पते दिल को देखे,न कि उसकी चमड़ी । जो मायूस बैठे इंसान को उठाए बिना उसकी जाति देखे,जो टूटे हुए दिल को जोड़े बिना उसके धर्म देखे,जो एक गाल परथप्पड़ खाने को कहे और उससे आगे बढ़कर गोली खाए । क्या अब भी करनी और कथनी के संगम देखने को कोई और तरफ नज़र दोहराओगे ।

तुम तो एक गाल से दूसरे गाल के थप्पड़ पर बिदक जाते हो,कहते हो कि यह सम्भव नही,जबकि उसने सीने पर एक के बाद एक करके तीन गोलियाँ उतरने दीं और बदले में क्या कहा,हे राम,हे राम,हे राम ।

उसने तो करके दिखलाया । मोहन तो करके ही दिखलाते हैं । उनका दर्शन उनके कर्म में है । कल जब वह जन्मेगा,तब उसके विचारों पर बात होगी,विचारों का दोहराया जाना ही तो मोहन को मोहन बनाता है । तुम उसे अच्छा कहो या कहो बुरा,दोनो ही का वह आधार है । मोहन को श्रेष्ठता के लिए किसी आधार की आवश्यकता नही है, क्योंकि  संपूर्णता इससे परे है ।

मोहनदास करमचंद गाँधी एक न मिटने वाली लकीर है,इस लकीर को लोग अपनी अक़्ल के हिसाब से आज नही तो कल मानेंगे । जिसके पास जब अक़्ल आएगी,वह जानेंगे कि कौन था मोहन ।
कल दुनिया मोहनदास करम चंद गाँधी का पैदा होना देखेगी और महात्मा गाँधी बनने तक के सफर में खुद को जितना पाएगी,उतने में ही उल्लास मनाएगी । कोई मोहन की सफाई भर से खुश होएगा,कोई मोहन के प्रेम से तरेगा,कोई मोहन की राजनीति से इतराएगा, कोई ब्रह्मचर्य के प्रयोग में खुद को भीगा हुआ पाएगा,कोई मोहन के लेखन से आंखे दो चार करेगा,सबको अपने अपने हिस्से का मोहन कल मिल ही जाएगा । पता नही किसको सम्पूर्ण मोहनदास करम चंद गाँधी मिलेगा....

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