Friday, October 4, 2019

मिलकर रहो

अलखल्क़ अयालुल्लाह यानि सम्पूर्ण सृष्टि खुदा का परिवार है । वसुधैव कुटुम्बकम यानि यह पूरा संसार एक कुटुंब है । यह बात कहने को रह गई है । कुछ लोग मानते हैं, वह पागल हैं क्योंकि धर्म के झंडे अब उनके हाथ में हैं, जिनके दिल छोटे,दिमाग गन्दा और विचार हिंसक हैं ।

जिसे भी लगता है कि उसकी तरक्की उसके धर्म से है और उसके धर्म की तरक्की दूसरे धर्म के लोगों को मिटाने और कमज़ोर करने से ही सम्भव है । वह बेहद मूर्ख हैं क्योंकि हर एक कि तरक्की हर एक के साथ मिलकर चलने से ही है ।

मानो या न मानो हिन्दू या मुसलमान मिलकर चलेंगे तो तरक्की करेंगे,जैसे पिछले दिनों उन्होंने बैलगाड़ी से होते हुए अंतरिक्ष तक का सफर तय कर डाला । अगर बंटकर चलेंगे, एक दूसरे को नीचा दिखाएंगे,एक दूसरे को बर्बाद करेंगे तो मिट जाओगे,सब के सब बर्बाद हो जाओगे,यह चाहे अपनी बर्बादी होते देख कर सतर्क हो जाओ या पूरे ही बर्बाद हों जाने के बाद मानो,मानना तो पड़ेगा ही ।

अपने धर्म के ऊपर लिखे सूत्र को याद करलो,परिवार की तरह एक दूसरे से पेश आओ,यह जानकर की तुमसे जलने वाले सबसे पहले परिवार ही तोड़ते हैं...

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