Wednesday, October 9, 2019

राजनीति समझो न यार

अभी हाल ही में कहीं हम बोले थे कि गाँधी ने अपनी बैटल फील्ड बनाई थी । उसमें अंग्रेज़ों को उतरने पर मजबूर किया,जहां वह फिसल फिसल कर गिरे । गांधी जानते थे कि शस्त्र से हम इतनी विशाल सेना से नही जीत सकते इसलिए अहिंसा को हथियार बनाया और नैतिकता,सत्य और मानवता का बैटल फील्ड बनाया,अंग्रेज़ यहीं मुँह के बल गिरे,क्योंकि इन मुद्दों पर गाँधी का मुकाबला करना उन्हें भी नही आया ।

खैर इसकी तफसील में नही जाते हैं, हम जाते हैं आजकी राजनीति पर,जहाँ बैटल फील्ड सत्ता प्रमुख तय करते हैं और मुँह के बल फिसल फिसल कर अच्छे अच्छे विरोधी गिरते हैं, वह फील्ड है, धर्म ।

भय्या गाँधी से ही सीखो,अपना मैदान बनाना सीखो । कब तक वर्तमान सत्ताधीषों की बिछाई चादर पर पड़ी गाँव तकिया लगाए लेटे हुए ट्रोल के सामने थिरकोगे । रफेल विमान के नीचे रखे गए दो नीबुओं ने तुम्हे उनकी थाप पर नचवा ही दिया ना ।

यह राजनीति है, कुरुक्षेत्र से भी भयँकर मैदान है । यहाँ हर चाल राजनीति ही तय करती है । तुम्हे पता है इन दो नीबुओं ने तुम्हे उसका विरोधी बना दिया है, जो रोज़ सुबह घर की छत पर काले मुँह की हंडियां टांगे, अपने ही नातेदारों से नज़र लगने से बचने की ढाल लगती है ।

यह तटपुनजुअहा विरोध छोड़ो,यह लिजलिजते मुद्दे में मत बहको, विरोध करना है तो उसका करो,जिससे देश की दिशा बदल रही है ।

यह भी ध्यान रखो,जनता है, उसे इन सबसे कोई दिक्कत नही,जिससे दिक्कत है, उस बात पर टिको । यूँ रोज़ ही चारा फेका जाएगा और तुम सब बेचारों की तरह उसमे उलझकर दम तोड़ दोगे ।

नीबू रखना,पूजा करना,वंदना करना,ईश्वर को याद करना,बिल्कुल भी गलत नही है । जो इसे धर्मनिरपेक्षता की आड़ में गलत कह रहें, वह सब जानते हैं कि उस कुर्सी पर नेहरू नही हैं और नेहरू के सिवा सौ प्रतिशत धर्मनिरपेक्ष कोई प्रधानमंत्री नही हुआ है । कोई न कोई,कहीं न कहीं इसकी जद में रहा है है, जो कि बुरा भी नही है । धर्म को मानना,उसके कर्मकांड की आलोचना राजनीति में आत्मघाती ही हुई है, यह काम सुधारकों का है ।

मैं फिर कह रहा हूँ कि हल्केपन से बचो । उनके फेके मुद्दों पर मत जाओ,वह इसके महारथी हैं । धर्म हमारे देश की रीढ़ है, इसे अपने हाथों में लो । धर्म गलत नही है, बस गलत हाथों में हो सकता है । धर्म का मखौल उड़ाने वाले चार वोट के मोहताज हैं । ऐसी हालत से बचो अगर राजनीति में हो । अगर अकेले घर पर लेटे लेटे तफरीह ही उड़ानी है, तो कुछ भी कहा,क्या ही फ़र्क़ पड़ता है । राजनीति करनी है, तो अपनी बैटल फील्ड बनाओ, उसमे सामने वाले को लाओ और मसलकर फेंक दो या फिर उसकी क्षेत्र की समझ रखकर उससे बड़ा,उसके क्षेत्र का महारथी बनकर,उसके मैदान में हरा पाओ,उसका क्षेत्र है धर्म....धर्म ही विजय है, धर्म ही पराजय और महात्मा गाँधी से बड़ा योद्धा इस क्षेत्र का हमे कोई नज़र नही आता । उन्हें मानते हो तो मेरी मान लो,अपना लक्ष्य तय करो,उसपर ही लड़ो न कि इधर उधर....

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