अब इतना भी मत पीटो प्यारी बच्ची को,देखो कितनी मासूम सी है।तुम्हे ज़रा भी शर्म नही आती बच्ची को मारने में,सुमित ने खींच कर 5 साल की शिखा को गले लगा लिया।अपनी माँ से कई थप्पड़ गाल पर खा चुकी शिखा के लिए सुमित अंकल की शह ने ठण्डी छाव का काम किया।सुमित दौड़ कर गया और कई तरह की टॉफी लाकर शिखा को दे गया साथ ही माँ को नसीहत की अब से अगर इस प्यारी बच्ची को मारा तो वह नाराज़ हो जाएगा।
माँ को भी एहसास था की उसकी सख़्ती के बाद कोई तो शिखा से नरमी से पेश आए,सुमित उस एहसास में खरा उतरा।कई रोज़ गुज़र गए।एक बार फिर मारने पीटने का दौर आया।फ्रिज से बर्फ़ चुराकर खाने की सज़ा शिखा को मिल रही थी।अनगिनत चप्पल खाने के बावजूद आज सुमित उसे बचाने नही आया।थक कर माँ भी शिखा को आँगन में छोड़कर काम करने चली गई।
शाम को ढूंढने पर भी शिखा नही मिली,पता नही कहाँ गई।दो दिन ढूंढा नही मिली।इधर उधर पागलों की तरह भागती माँ शिखा को एक नज़र देखने के लिए बेताब थी।अपने और शिखा के हमदर्द सुमित को साथ ले सारा मोहल्ला एक कर डाला, कुछ पता नही चला।सुमित रोता जाता और हड़काता की फ़ालतू पीटती थी उसे।काश उस दिन मारते वक़्त मैं आ गया होता,मेरी शिखा मुझसे तुम्हारी शिकायत करके खुश तो हो जाती।दोनों चीख़ चीख़ रोते रहे।थक कर सुमित वापिस हुआ और बेसुध सी माँ वहीं आँगन में पड़ी रही जहाँ शिखा को छोड़कर गई थी।
सोते में एक तेज़ सी बदबू ने माँ की नींद को झकझोड़ दिया।इतनी तेज़ बदबू,मगर यह बदबू तो उसे अपने जिस्म की लग रही थी।वह बेतहाशा बदबू की और भागी।दौड़ती रही,बदबू और तेज़ होती चली गई।सामने अँधेरे में एक गैराज के सामने दसियों साल पुरानी कार फिएट खड़ी थी।बदबू वहीं से आ रही थी।कार के पास नँगे पाँव खड़ी माँ को पैर में चपचपाहट महसूस हुई,देखने पर ख़ून जैसा कुछ था,यह चीखी।कार के दरवाज़े में शिखा की फ्रॉक फंसी बाहर झाँक रही थी।उसने एक झटके में दरवाज़ा खोला,सीट पर शिखा फूली हुई पड़ी थी।पाँच साल की बच्ची फूलकर औरत हो गई थी।जिस्म पर एक भी कपड़ा नही,पेट पर दो तीन टॉफियां पड़ी थी।सीट के इर्द गिर्द अंकल चिप्स बिखरे पड़े थे।उसने लपक कर शिखा को गले लगा लिया।
अब बदबू खुशबू में बदल चुकी थी।माँ ने चूमते हुए शिखा के गाल को देखा,उसपर आज भी वह मार खाने से निकले आँसू जमे हुए थे।पीछे खड़ी भीड़ कह रही थी,सुमित को ढूंढो।सुमित को पकड़ो जबकि माँ की गोद में नँगी पड़ी 5 साल की सुमित अंकल की प्यारी सी शिखा कह रही थी "माँ,सुमित अंकल कितने प्यारे हैं, वह हमे कभी रोता नही देख सकते" माँ उस लाश के होंटो पर ऊँगली रखकर कहती है बहुत देर हो चुकी,अब चुप हो जाओ,सो जाओ।।।।।।
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