अगर आपको सिर्फ मुसलमान होने के लिए याद किया जाए तो यह आपकी तौहीन है।अगर आपको मुसलमान सिर्फ अपना समझकर याद करें तो यह आपपर ज़ुल्म है।आपकी सोच इतनी गहरी थी की उसमे सब समा जाएँ।आपका इल्म इतना गहरा था जिसके सामने जाहिलियत खुद बखुद दम तोड़ दे।आज जिस इल्म की इमारत पर हम इतराते नही फिरते उसकी नीव आपने रखी।
आज 11 नवम्बर को जब ज़मीन पर आपके कदम पड़े तो किसने सोचा था की यह इंसान नही बल्कि मोतियों को गूँथने वाला धागा है।जिसकी ज़िन्दगी लोगो को जोड़ने में खर्च होगी।किसने सोचा था जो बेटा अपनी माँ को 11 साल की उम्र में खो देगा।वो मदरसों के चबूतरों पर बैठ कर एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी जम्हूरियत में इल्म का झण्डा बुलन्द करेगा।किसने सोचा था मदरसों की काई से लिपटी दीवारों में वोह अरबी,फ़ारसी,इंग्लिश,हिंदी,उर्दू का नायाब शरबत बनेगा।किसने यह ख्वाब बुना होगा की बहारों से महरूम कोई लड़का पत्रकारिता,लेखन,एक्टिविज्म,पॉलिटिक्स,समाज सेवा,लीडरशिप में सबसे बड़ा परचम थमेगा।कौन देख रहा था आज़ादी से सबसे पहले काँग्रेस का सबसे कम उम्र का प्रेजिडेंट यह चुना जाएगा।किसी ने सोचा भी नही था की बटवारे में अपनी ज़मीन को रोते हुए छोड़ते लोगो को किसी के लफ़्ज़ ऐसे बाँध लेंगे की जो जहाँ रहा वही रुक गया।
मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद थे वोह,जिनकी आज पैदाइश है।यह भारत जैसा महान देश है जिसने उन्हें अपना पहला शिक्षा मंत्री चुना।यह मौलाना आज़ाद की महानता थी की उन्होंने इस माटी में ही अपनी हर साँसों को जिया निखारा और खूबसूरती से रुखसत हो गए।यह मुल्क़ एक से एक नगीनों ने मिलकर बुना है।उन नगीनों में एक और क़ाबिल नगीना थे मौलाना आज़ाद।जो सबके दिलों में बराबर से थे।जिनकी रूह ख़ालिस भारतीय थी।जिनके लफ़्ज़ लोगो के लिए सबक थे।हमे फ़ख्र है की हमारा पहला शिक्षा मंत्री वाक़ई में ज़िन्दगी भर शिक्षित करता रहा।हमे हमारे मुल्क़ को बुनने,बढ़ने,मज़बूत होने के लिए शिक्षित करता रहा।आज बहुत याद आ रहे हैं मौलाना आज़ाद।आपकी ज़रूरत तो हमेशा ही खलेगी।मगर आपके बनाए रास्ते आज भी बदस्तूर मंज़िल की ओर बढ़ रहे हैं।इसलिए खुश भी बहुत हैं।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Thursday, November 10, 2016
मौलाना
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hafeezkidwai
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