देखो दूर कहीं मीर अनीस खड़े हैं।रुँधे गले से मर्सिये सुना रहें हैं।मैं तुमसे कह रहा गर्दन घुमा कर देखो तुलसी अवधी में रामायण के पन्नों को पलट रहे हैं।पीछे देखो रसख़ान कृष्ण के पाँव में पड़े दोहे चौपाई की फसल बो रहे हैं।उधर दूर सर ऊँचा करके देखो न मोहम्मद रफ़ी ने तान भर दी है।सर झुकाकर देखो उस्ताद बिस्मिल्ला खान शहनाई बजा रहे हैं।देखो चौकी पर मुँशी इंशा अल्लाह खान रानी केतकी को बैठाए निराला से बतया रहे हैं।वोह रहे जायसी और ख़ुसरो,देखो क्या बुन रहे हैं।कबीर काली दास को गेंदे की माला पहना रहे हैं।अरे उधर गाँव तकिया से टेक लगाए ग़ालिब,कृष्ण बिहारी नूर,फ़िराक़,मीर तक़ी मीर,साहिर,मजाज़ की महफ़िल को देखो न।बगल में लेटे सज्जाद ज़हीर और प्रेमचन्द की तो फ़िक्र कर लो न।अमृता,मंटो,इस्मत,श्रीलाल,केपी सक्सेना,राही मासूम रज़ा उधर बैठे अंताक्षरी खेल रहे हैं।
यह सारे नाम आज क्यों ले रहा हूँ।ताकि तुम देख लो इस बहस और घुटन भरे माहौल में तुम क्या क्या छोड़ते जा रहे हो।देखो जब तुम्हे सिर्फ दो ध्रुओं पर खड़ा कर दिया गया हो तो यह ओस की बूंदे कहाँ महसूस होंगी।जब तुम्हारी सुबह से रात सिर्फ सियासी चौखट पर बीतेगी तो इन्हें कहाँ महसूस कर पाओगे।सच बताऊँ जब जब तुम्हे सिर्फ सियासत में उधड़ते,बिखरते,मिटते देखता हूँ तो लगता है की यह क्या हो गया।जब तुम ज़िन्दगी के रस को छोड़ विषपान कर रहे होते हो तो डर जाता हूँ।जब तुम उन विषयों पर खुद को बाँट रहे होते हो जो दूसरों ने तुम्हारे दिल में डाले हैं तो अफसोस होता है।मेरा यक़ीन करो जब तुम उलझ जाना।जब तुम अवसाद के मुहाने पर होना।जब तुम बेचैन होना तो ऊपर बताए किसी को भी थाम लेना।सुकून मिलेगा।वही सुकून जो तुम कहीं किसी कोठरी में रख कर भूल गए हो।अपने को पार्टी का कार्यकर्ता या प्रवक्ता मत बनाओ।इधर उधर मौजूद हर रस का मज़ा लो।यही तो ज़िन्दगी है।ज़िन्दगी को जियो ताकि चेहरे पर मुस्कान बाकी रहे।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Monday, November 21, 2016
यह भी तो हैं
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