Saturday, November 19, 2016

डर का व्यापार


देखलो आपातकाल के नाम से मुल्क़ को डरवाना बन्द कर दो।लोगों के दिलों में डर मत पैदा करो।उन्हें कल के अँधेरे की तरफ आज ही मत ले चलो।जिस देश ने हर तरह के ज़ुल्म सहकर आगे के ख्वाब बुने हों,उन्हें कमज़ोर मत करो।
मैं मानता हूँ की कुछ कदम गलत हैं, तो कुछ तरीके।मगर मेरा यक़ीन करो इस मुल्क़ को इन सबसे निपटना आता है।मैं तुम्हे किसी भी हाल में सीरिया,लेबनान,लीबिया,इराक़ नही बनने देना चाहता।मेरी तरफ देखो,सोचो,तुम्हारा हर क़दम इस ज़मीन के उस हिस्से को संवारने में लगना होगा जहाँ तुमने पहली साँस ली थी।किसी प्रोपेगण्डे में मत पड़ना।अगर तुम्हे लगता है, यह सरकार गलत है, यह नेता बुरा है तो उठो।लोगों को तैयार करो की वोह इन्हें हटा दे।अपने लोगों पर भरोसा करो,वोह ज़्यादा दिन गलत को सही जगह नही बैठाएंगे।
तुम अगर वाक़ई लीडर हो तो सोच लो की तुम्हारा काम क्या है।तुम्हारा काम है अपनों के दिलों में पैदा डर को खत्म करना।मगर तुम आपातकाल को दिखाकर अपनों को डाराओगे तो बताओ तुम्हे कैसे अपना लीडर कहूँ।मेरी बात की गम्भीरता को पकड़ो।डराने का काम वोह करता है जिसके पास जनाधार नही होता।जिसे अपने अंदर ही आत्मविश्वास नही दिखता।अगर तुममे कोई भी खूबी है, खुद पर भरोसा है तो अपनी जनता से कहो,जो होगा देखा जाएगा।लोगो को हिम्मत दो की हर ज़ुल्म के खिलाफ हम आगे खड़े मिलेंगे।
मैं अभी कह रहा की बहसी नेता मत बनों।लोगो को हिम्मत दो।लोग अगर परेशान हों तो उन्हें ज़िन्दगी के सुनहरे दौर को दिखाओ।उनमे विश्वास भरो।उनसे कहो की दोस्त अगर आपातकाल आ भी गया तो हम और तुम मिलकर उससे निपट लेंगे।कोई ने अगर देश को ज़रा भी नुकसान पहुँचाया तो हम और तुम मिलकर उससे अंत तक निपटेंगे।यह भरोसा दो की अगर तुम्हारी थाली में रोटी खत्म करने की साजिश होगी तो मैं तुम्हे अपनी आधी रोटी दूँगा।अपनी अवाम को भरोसा दो की मौत,ज़ुल्म,अँधेरा सब का तुम तक पहुँचने से पहले,मुझसे निपटना होगा।
अभी वक़्त है हर मुश्किल से लड़ने को तैयार हो और लोगो को तैयार करो।मायूस ज़रा भी मत हो।आज तुम्हारी बात भले अनसुनी हो जाए मगर यक़ीन करो ज़ख्म कब तक मरहम से भागेगा।लोग तुम्हे नही,बल्कि तुम्हारे अंदर मौजूद अपनी हिम्मत को ढूंढ ही लेंगे।रुदाली बनकर सिर्फ दामन ही नमकीन होंगे।लोगो को हिम्मत देकर तुम वाक़ई लीडर बनोगे।सोचो तुम्हारे पास से जो गुज़रे,वोह ज़बरदस्त तेज के साथ आगे बढ़े।उसके इर्द गिर्द मायूसी दम तोड़ दे।यह सच है जिस दिन से तुम डराने की ढाल की जगह हिम्मत की तलवार लोगे,यक़ीनन तुम लीडर बन जाओगे।देश लीडर की कमी से जूझ रहा है।देश क्या दुनिया जूझ रही है।अभी उठो और अस्थिमज्जा बन कर लोगो को मज़बूत करो।
जब जब तुम सीना तानकर खड़े होंगे।तब तब आपातकाल कुपोषण सा तुम्हारे सामने रेंगेगा।यक़ीन न हो तो आपातकाल से निपटने वाली पिछली पीढ़ी को देख लो।भरोसा रखो,गलत को गलत कहने से मत हिचको और सही को सही कहने के लिए मौत से गुज़र जाओ।बस ख्याल रखना हर कदम मुल्क़ और इंसानियत की तरफ हो।

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