Friday, February 10, 2017

क़ौम क़ौम क़ौम

मुझे क़ौमी एकता की अपील से सख़्त चिढ़ है।एकता सिर्फ़ और सिर्फ इंसानियत के लिए सही है, ज़ुल्म के ख़िलाफ़ सही है मगर यूँ चुनाव के लिए हिन्दू एकता,मुस्लिम एकता मुझे हरगिज़ नही पसन्द।ऐसे अलग अलग एक होकर तुम मुस्लिम लीग और जनसंघ की ही इमारत खड़ी करोगे।ज़रा सी बात पर कमज़ोर के टुकड़े टुकड़े कर दोगे।क्यों भाई यह बिना क़ौम को एक करने की अपील के तुम सबकी दालें नहीं गलती।इलेकशन चौखट पर आए नही की एकमुश्त वोट देने की गुलुकारियां शुरू।
क्या सब बैल बकरी भेड़ हैं जो एक साथ हाँकना है।लोगो की अपनी पसन्द,अपने मकसद,अपने मसले और अपने रिश्ते हो सकते हैं।पता चला एक ने चीख़ कर हिन्दू अस्मिता का नारा दिया और सारे गाय की तरह एक तरफ।वही दूसरी तरफ एक ने मुगलई सल्तनत की दुहाई दी,ज़ख्मो को छेड़ा और सारे बकरियो की तरह एक तरफ।अरे अपनी भी कोई सोच है।कोई विज़न है।कब तक दूसरों की आवाज़ में अपनी मुश्किलो का हल ढूँढोगे।यह जो पूरी की पूरी लॉबी है तुम्हारे दर्द को उकेरने की,यह झूठी है, यह तुम्हारे जज़्बात को छेड़ेंगे और तुम आँखो पर पट्टी बाँध इनके पीछे पीछे चल दोगे।
पूछो इनसे जब यह तुम्हारी कुंडी खड़खड़ायें, की मेरे बच्चों के लिए क्या प्लान है।मोहल्ले के अस्पताल और स्कूल के लिए क्या है।रोज़गार और सुकून के लिए क्या है।जब एक झटके में हमारे घर जला दिए जाते हैं, तो उस आग को बुझाने के लिए क्या है।यह तुम्हारे कन्धों से बोलकर चले जाएँगे और तड़पते रह जाओगे तुम।मैं हो सकता है गलत हूँ, बुरा हूँ फिर भी एक बार यह जो धर्म,सम्प्रदाय,क़ौम के नाम की एकता की बात कर रहे हैं उनसे पूरे समाज,देश,शहर का स्ट्रक्चर पूछ लो।यह जो तुम्हारे अंदर दूसरों का डर डालकर भेड़ बनने को कहा जाता है, कहने वाले यक़ीनन भेड़िये ही हैं।अभी कह रहे हैं भेड़ बकरी मत बनना,अपने दिमाग का इस्तेमाल करो,जिसे ईश्वर ने इस्तेमाल करने के लिए दिया है नाकि गुलाम बनने के लिए।
एक हो या न हो अपने पड़ोसी,अपनी ज़रूरतों के लिए बात करो।सबकी ख़ुशी,सबकी तरक्की का ज़िक्र करो।मोहब्बत में ही सुकून है।अगर हो सके तो इंसान बनना,थोक में किसी की चीख़ पर नारे लगाते हुए मत निकल जाना।यह दोबारा नही लौटेंगे जबकि तुम्हे अपने हर तरह के लोगों के साथ रहना है।अपने फैसले खुद करो क्योंकि तुम्हे एक अदद दिमाग मिला हुआ है।

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