Wednesday, February 22, 2017

इलाज करो

कोई किसी को मार रहा है तो कोई किसी को सहारा दे रहा है।कोई अँगारे उगल रहा है तो कोई पानी लिए खड़ा है।हर तरफ एक सा माहौल।कोई आने वाले कल को एकन्गा बना देना चाहता है तो कोई उसकी सूरत खूबसूरत बनाने में लगा हुआ है।अजब हाल है।
उन तोड़ने वाले,भड़काने वाले,नफ़रत फैलाने वाले लोगों को गौर से देखना होगा।इनके बचपन में झाँकिये।यह नफ़रत के बीज वहीं कहीं दबाए गए थे।जिसे अब दरख्त की तरह हम देख रहे हैं।इनकी आँखों में झाँकिये देखिये उसमे कोई विचार की जगह सिर्फ गुस्सा दिखेगा।इनके साथ इनके बड़ो ने बचपन में कुछ तो गलत किया है।
यह जो आज समाज को जला देना चाहते हैं, इनके बचपन मे इनके साथ कुछ तो ऐसी गलत हरकत इनके संगठन,घर या मोहल्ले में हुआ है जिसकी गहरी छाप इनके दिमागों में छपी हुई है।मैं जब इनको चीखते चिल्लाते अपने से बड़ो को मारते और गाली बकते देखता हूँ,तो एक बार प्रश्न ज़रूर उठता है की इनके दिल में इतना विद्रोह क्यों।
मैं दावे से कह सकता हूँ व्यक्तिगत नुकसान उठाए बिना कोई हद दर्जे पागलपन पर नही उठ सकता है।इनके शरीर को देखा जाए तो वोह निशान ज़रूर मिलेंगे जो इनको गुस्से से भर देते हैं।इनकी आत्मा को भी मारा जाता रहा होगा।जिसकी कोर इन्हें चलाने वालों के हाथ में दबी हुई है।
हर बवाली की आत्मा या शरीर को ऐसी चोट दी गई होती है जो उसके जीवन में तो नही दिखती है मगर उनमे इतने गहरे अंदर तक दबी होती हैं की वोह नफ़रत में उबला करता है।
इनकी समस्या को पकड़िये।उसपर मरहम रखिये।आत्मा को पहुंचाई गई चोट को महसूस करिये,यह सुधर जाएँगे।मैं ने एक से एक बड़े गुंडे को अपने सामने रोते हुए देखा है।उनका रोना तब था जब उनको,वोह क्या हैं का दर्शन करा दें।इतना ख्याल रखें भीड़ कभी सुधरती नही मगर व्यक्ति के सुधरने की गुंजाईश कभी खत्म नही होती।उठिये और सुधार में लगिए।डॉक्टर बीमारी पर चर्चा ही कर सकते हैं मगर बीमारी की बुराई करते हुए वक़्त नही काट सकते।उठिये और डॉक्टर बनकर नफ़रत का इलाज शुरू कीजिये।

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