कितना खुश हो न इसरो की कामयाबी पर,होना भी चाहिए।आखिर वोह देश जो चाँद पर अपने निशान छेड़ता है, जो हर एक को मौका देता है की हाँ ऊपर उठो।कल जब हम इसरो की इतनी बड़ी कामयाबी के जश्न में थे तब भी हमने अपनी मूल भावना को बरकरार रखा,सबको साथ ले चलने की भावना।
कल जब PSLV_C37 उड़ान भरता हुआ अमरीका,नीदरलैंड,स्विट्ज़रलैंड,इज़राइल,कज़ाकिस्तान,अरब अमीरात के सेटेलाइट को एक साथ ले गया।कितना खूबसूरत नज़ारा था।लग रहा था की नेहरू और साराभाई की सोच दूर कहीं आसमान में जा रही है।एक चाहता था सबको साथ ले चलना,दूसरा चाहता था सबके लिए सब कुछ बना डालना।
जितनी जी में आए गाली बक लेना,कोई अफ़सोस नही।मगर हो सके तो नेहरू के इतना विज़नरी कोई दूसरा शख्स दिखा तो देना।जो किसी को कोसे न बल्कि निर्माण पथ पर चले।एक बार पलट कर देखना की आखिर हम दुनिया के सामने सर उठाकर चलने वाले बने हैं तो उसमे कौन कौन से संसथान हैं।उन संस्थानों को बनाने वाले को खोजो,पढ़ो,तब जानोगे की निर्माण में हाथ किसके थे।
मुझसे बहस करके,या खुद से उलझ करके कोई हल नही निकलने जा रहा।उठो और कहो की हाँ हम अपने देश को हर झगड़ो,परपंचो, दुराग्रह से अलग एक वैज्ञानिक देश बनाना चाहते हैं।मैं मायूस होता हूँ की जिन नौजवानों को इसरो जैसी जगहों पर पहुँचना चाहिए था वोह सड़क पर खड़े संस्क्रति की रक्षा लाठियों से कर रहे हैं।जिनको लैब के अंदर अपने समाज की बीमारियों से लड़ना था वोह खुद वायरस बने घूम रहे हैं।
तुमको ज़हर की तरह लगेंगी मेरी बातें मगर कल तुम जब मुस्कुराए होगे इसरो पर तो यह ज़रूर सोचना की तुम क्या कर सकते थे।एक आज़ादी की ही लड़ाई काफी नही थी।एक निर्माण की भी लड़ाई होती है उसमे देखना तुम्हारा क़दम निर्माण का है या विनाश का है तुम्हारा बोलना,चलना,लिखना,करना आने वाली नस्लों की ज़िन्दगी बेहतर बनाएगा या बुरी यह देख लो।अगर इसरो की सफलता पर खुश हो तो उसमे अंदर मेहनत करते वैज्ञानिको को देखो,कुछ न हो तो कम से कम उनके परिवार को एक सुकून भरी ज़िन्दगी और माहौल ही दे दो।जहाँ उन्हें डर न हो।
मैं फिर कह रहा हूँ की तुम सबमें बहुत कुछ है, जो इस देश की तस्वीर और खूबसूरत कर सकता है।बस एक बार इसे बनाने में लग जाओ।आओ हमारे साथ इसरो की खुशिया मनाओ मगर उन्हें भी याद रख लो जिन्होंने इसका ख्वाब देखा।ईंट रखी।आज साराभाई और नेहरू दोनों आसमान से बेहद खुश होंगे की चलो हम एक क़दम और आगे बढ़ गए।हमारे वैज्ञानिकों ने मुल्क़ को उनके ख्वाबों की उड़ान दे दी।हमारे वैज्ञानिकों ने सबको साथ ले जाकर भारत की आत्मा से रूबरू करवा दिया।यही तो भारत है।हाँ यही भारत है।
कुछ किस्से हमारे जिस्म के साथ दफ़न हो जाएँगे .मेरे जाने के बाद सिर्फ वही रह जाएगा जो दिमाग की खुराफात ने उपजा कर शब्दों में ढाला था.इसलिए जरूरी हो जाता है दिमाग में चलने वाली इन आम से ख़ास खुराफातों को कहीं न कहीं उकेर दिया जाए.अब हम पत्थरों पर शिलालेख लिख नही सकते.जानवरों की खालों,पेड़ की छालों या खंडहर की दीवारों पर कोई अभिलेख लिख नही सकते तो यहाँ आ गए.ब्लोगर पर,अपने दिमाग को दर्ज करवाने....
Wednesday, February 15, 2017
इसरो
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hafeezkidwai
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