Tuesday, February 14, 2017

मोहब्बत में कन्वर्जन

जो जैसा है उसे वैसे ही क्यों नही अपना लेते हो।यूँ हमेशा कैंची लिए माली की तरह हर पेड़ को अपने बनाए साँचे की तरह ढालने लगते हो।करीब से देखना तो अंदाज़ा हो जाएगा की माली पेड़ से मोहब्बत नही करता है।बल्कि वोह एक काम कर रहा है।मोहब्बत तो बेलौस होती है।उसमे किसी को कांटा छांटा नही जाता।
मुझे तक़लीफ़ देती हैं वोह मोहब्बतें जो बदलने को मजबूर करती हैं।जी कहता है की चीख़ कर कह दूँ की जिसे तुम मोहब्बत कह रहे हो वोह तो मिशन है।हाँ मुझे बदल देने का मिशन।मुझे मेरे स्वरुप से भटका देने का मिशन।जब तुम मेरे पाँव पर सर रखकर कहते हो की मैं तुमसे अथाह मोहब्बत करता हूँ।तो मैं सच बताऊँ,खुद को आसमान तक ऊँचा महसूस करता हूँ।मगर जब तुम मुझसे अपने मज़हब के तौर तरीके पूरे करने की उम्मीद रखते हो तो मुझे छुपी हुई बेड़िया नज़र आने लगती हैं।
मुझे मोहब्बत में कन्वर्जन सिर्फ एक व्यापार लगता है।जो मोहब्बत में मज़हब की बेड़ियाँ नही काट सकता उसे इश्क़ क्यों कहें।इश्क़ में अगर मज़हब रुकावट है, तो रुक जाओ या पार कर जाओ मगर यूँ साथी को बदलने पर मजबूर तो मत करो।एक बार आँखों में झाँक कर देखना की तुमने जो इश्क़ किया है वोह नशे में तो नही बदल रहा।कहीं तुम्हारी लगाई शर्ते पूरी करते करते तुम्हारा आशिक़ खुद में घुलता हुआ खत्म तो नही हो रहा।कहीं तुम्हारा इश्क़,तुम्हारे साथी की साँसे तो नही रोक रहा।मैं फिर कहता हूँ इश्क़ करो मगर पाने के लिए इस क़दर बेताब मत हो की तुम्हे वोह तो मिल जाए मगर इश्क़ मर जाए।
इश्क़ में अगर तुम मज़हब,विचार या कुछ भी बदल कर पाना चाहते हो तो जाओ पुराने बर्तन की बाज़ारों में,वहाँ चीज़ें बदल कर अक्सर तुम्हारे मन की मिल जाया करती हैं मगर इश्क़ में इतना तो समझ लो,व्यापार नही हुआ करते।हाँ वोह भी समझ लें जिन्हें बदलने के न्यौते मिलते हैं या जिनपर बदलने की शर्ते लगाई जाती हैं, देख लें की उन्होंने किस से मोहब्बत की है।मोहब्बत में इंसान को समझने का हुनर फीका नही पड़ना चाहिए।हो सके तो व्यापार से एक झटके में बाहर आ जाओ।तुम्हारे जाने से वहाँ कोई फ़र्क़ नही पड़ने वाला,क्योंकि वहाँ माली बैठा है, जो पौधे को अपनी तराश से अलग पकड़ वैसे भी उखाड़ फेकेगा।उठो और ज़िन्दगी के मज़े लो।
एक बारीक़ सलाह की मोहब्बत और दलदल से एक झटके में निकला जाता है।धीरे धीरे निकलने की कोशिश करोगे तो डूबना निश्चित है।

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