अगर फुर्सत मिले तो आतंकियो के नज़दीक़ जाना।उन नामों के जो तुम्हारी ज़बानों पर चढ़े हों।वोह नाम जिनसे तुम्हारे मशहूर पत्रकार वेद वैदिक जैसे लोग मिलते रहें हैं।उनकी ज़बान को सुनना की वोह आतँकी कितने बड़े राष्ट्रवादी हैं।वोह अपने देश को ओढ़ते बिछाते हैं।आतँकी अपने देश से आतँक वाली मोहब्बत तो करते हैं।
तो इतना समझ लो की ख़ाली राष्ट्रवाद की शॉल ओढ़कर कुकृत्यों पर पर्दा नही डाला जा सकता।जिस तरह आतँकी चाहे जितना बड़ा राष्ट्रवादी हो मगर इससे उसके शैतानी काम छुप नही जाते वैसे ही तुम्हारे राष्ट्रवाद की आड़ में गुनह नही छुप सकते।मैं तुम्हारी तरह पागल आशिक नही हूँ की जो हमे नही मिला उसके मुँह पर तेज़ाब डाल दिया।तुम अपने देश से ऐसे ही अब मोहब्बत करने लगे हो।
जो व्यक्ति तुम्हारी कच्ची परिभाषाओं में फिट नही बैठा तुमने उसके मुँह पर तेज़ाब डाल दिया।इससे तुम्हे क्या लगता है की तुमने उसे सज़ा दी है।तुमने अपने भारत की शक्ल पर तेज़ाब डाला है।तुम्हारी सोच इस हद तक घटिया है की दुनिया की किसी की भी बेटी का बलात्कार कर देना चाहते हो।तुम्हारे इतने घिनौने काम को भी लोग राष्ट्रवाद की आड़ में सही ठहरा रहे हैं।
मुझे हरगिज़ हैरत नही है।एक ज़माने में रोम में जब राजनीती ने धर्म को आपने मुकुट में सजाया था।तब उनके छोटे छोटे ज़मीदार भी रोम की माटी के नाम पर आम अवाम से उनका ख़ून तक मांग लेते थे।ज़मीदार घरों से बेटियां यह कहकर उठवा लेते थे की रोम को इसकी ज़रूरत है।रोम की अवाम रोम के लिए ऐसे ही पागलपन में तबतक झूमती रही जबतक उनके दिमाग में राष्ट्रवाद का व्यापार समझ नही आया।
राष्ट्रवाद की सबसे पहली चोट राष्ट्रप्रेमी को दी जाती है।यह एक खरा व्यापार है जिसमे सिर्फ लिया जाता है।यक़ीन न हो तो इस वक़्त आने वाले ज़्यादातर विज्ञापन देख लीजिये लोग टाइल्स,पान मसाला,मोटरसाइकिल,पेंट तक राष्ट्रवाद के नाम पर बेच रहें हैं।हर गलत काम को राष्ट्रवाद का लिबास पहनाकर सही साबित किया जा रहा है।हर ख़ून को राष्ट्रवाद का नाम देकर मुक्ति कहा जा रहा है।सबसे अच्छी बात तो यह की राष्ट्रवाद के नाम पर सबसे ज़्यादा उन्हें बदनाम किया जाने लगा है जिनकी पिछली पुश्ते इसी माटी के लिए तहस नहस हो गई हैं।
मुझसे राष्ट्र और राष्ट्रवाद पर बात करने से पहले देश की नागरिकों की सेवा करके आना।यहाँ उनको कोई तवज्जो नही जो राष्ट्रवाद का व्यापार करते हैं।जब देश सेवा आ जाए तब खड़े होकर कहना की यह गलत है।जब देश के नागरिकों में विभेद करना भूल जाना तब आना।मेरे सामने टिकने से पहले अपने परिवार की आँख में आँख डालकर कहना की हाँ तुम अपने परिवार के प्रति,देश के प्रति समर्पित हो।यहाँ फ़र्ज़ी बहस करके यह मत साबित करना की तुम राष्ट्रवादी हो।ऐसे तो पाकिस्तानी आतंकवादी खुद में राष्ट्रवादी हैं ही।
मेरा राष्ट्रप्रेम संविधान से मोहब्बत से शुरू होता है।हर नागरिक से बिना फ़र्क प्रेम तक जाता है।हर बेटी मुझे मेरे आँगन की बेटी लगती है।हर बेटा मुझे भाई लगता है।मेरे पूर्वज मेरे लिए पूजनीय हैं।मेरे बड़े मेरे लिए सबकुछ हैं।मैं सिर्फ उसे ही सच्चा राष्ट्रप्रेमी मानूंगा जो भारत की मूल आत्मा को छूता हो नाकी आतंकी उनके छिपे आदर्श हों।हम स्वतन्त्रता सेनानियों के घर के लोग हैं जब अंग्रेज़ों को धूल चटा सकते हैं तो यह फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी क्या चीज़ हैं।देश के लिए कल भी जान दी थी अब भी उसकी खूबसूरती बनाए रखने के लिए काफ़ी हैं हम।यहाँ तुम्हारे फ़र्ज़ी राष्ट्रवादी सर्टिफिकेट की भी कोई ज़रूरत नही।आतँकी को अपने आप को छोड़ सब आतँकी ही नज़र आते हैं।
अभी वक़्त है देश से सच्ची मोहब्बत करना सीख लो।।सच्ची मोहब्बत।।।
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