BHU पर क्या कहा जाए,निर्लज्जता को भी शब्द देने पड़ें तो इससे बुरे दिन और क्या होंगे।अफसोस इस बात का है की कोई भी अपना हक़ माँगता है तो उसे आप एंटी नेशनल गैंग में शामिल कर देते हैं और चैन की नींद सो जाते हैं।आपको खुद नही पता की हर बार दूसरें के हक़ पर पाँव रखकर एंटी नेशनल-एंटी नेशनल का तराना गाते गाते आप खुद एंटी ह्यूमन गैंग में बदल चुके हैं।
लड़कियाँ हैं, जो सिर्फ सुरक्षा माँग रही हैं।भूल गए निर्भया और उसपर रोने वाले देश के आँसू।आप लड़कियों को हॉस्टल में सुरक्षा नही दे सकते,दें भी तो कैसे,जब कैम्पस में उनपर ही लाठियाँ चलवा सकते हैं, तो आपकी सुरक्षा देने की मंशा ही नही है।
सच तो यह है की अब हम ऐसा समाज बन चुके हैं की हमारे ही आँगन से बेटियाँ उठा ली जाएँ तो हम दूसरी तरफ मुँह घुमा बहुत से बहुत रो सकते हैं मगर रोक नही सकते हैं।यहाँ तो हर दर्द का सौदा धर्म और विचार के तराज़ू पर हो रहा है।
एक बार सोचिये लड़कियां वही तो BHU में माँग रही हैं जो उन्हें अपने घर में भी मिलना चाहिए,सुरक्षा।।न आपसे खाना,न कपड़ा,न फ़ीस,न स्कॉलरशिप कुछ भी तो नही,वह भी बर्दाश्त नही हो रहा।हाँ हमे पता है आपको कोई भी माँग पसन्द नही,आपतो सबकुछ भीख की तरह देने के आदी हैं।
इस वक़्त लड़कियों के समर्थन में बनारस के शहर को,उनके परिवारों को और हर उसको आना चाहिए जो चाहता है देश की हर लड़की सुरक्षित रहे।जो भी अगर मगर लगाकर इससे मुकर रहा है, यक़ीन जानो यही वह लोग हैं जो मौका पाते लड़की को इंसान नही समझेंगे।रही बात वीसी की तो उनके सर की काली टोपी ने पहले उनका दिमाग में अँधेरा भर दिया है, अब तो वह हर तरफ अँधियारा ही चाहते हैं।
मैं चाहता हूँ की इसपर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल तुरन्त संज्ञान लें,जैसे वह साल भर पहले लिया करते थे और वीसी को वहाँ से हटाकर उनकी सही शाखा में भेजें।आज वक़्त माँगा है महामहिम से,मिल गया तो शिकायत पत्र उन्हें सौपेंगे ही,तब तक हम सबको BHU के लिए,उसके स्टूडेंट के साथ मज़बूती से खड़े रहना होगा।हम सब एक हैं।एंटी ह्यूमन गैंग के खिलाफ हम सब एक हैं।
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