घर में घुसकर गोली मारी है, बेहद बहादुरी का काम किया है।अवार्ड देने वाला काम।मारने ही वाले को क्यों अवार्ड दिया जाए,इसपर तो उनका भी हक़ है जो इसे सही ठहरा रहें हैं।ख़ून से तो उनके भी हाथ सने हुए हैं जो किसी न किसी तरह गौरी लंकेश में ही कमियां ढूंढकर हत्या को जायज़ ठहरा रहें हैं।
यह वक़्त उन लोगों से सतर्क हो जाने का है जो "लेकिन" लगाकर गौरी की हत्या गौरी पर ही डाल रहें हैं।हर तरफ मौत बिखरी पड़ी है।माहौल हत्या से उतना खराब नही होता जितना हत्या को सही ठहराने वालो से होता है।
खैर उन सबको इस हत्या का अवार्ड जिनके दिलों में हल्की भी ख़ुशी है।
हम सब ग़म में हैं, यह भी उन सबके लिए ख़ुशी की बात है।वैसे भी मुझे ज़रा भी हैरत नही ऐसी सोच पर।यही वह लोग हैं जो मौका मिलते ही हमारे सर उतार लेंगे।एक बात गौर करके समझ लीजिये,जिसने गोली मारी है या जो हमे मार रहा है, वह उतना खतरनाक नही है, जितना खतरनाक हमारे बीच में पर्दा डाले वह लोग हैं, जो ऐसी हर हत्या में सम्भावना देख लेते हैं, अपने विचारों के फलने फूलने की सम्भावना।
वैसे तो सब चुन चुन के मारे जाएँगे,यह कितना खूबसूरत वक़्त है।हम सब अपने देश के लोकतन्त्र और उसकी खूबसूरती को बचाए रखने के लिए मारे जा रहें हैं।यह वही वक़्त है जो सत्तर साल पहले हमारा देश देख रहा था।सब के सब आज़ादी के लिए मारे जा रहे थे,जेल जा रहे थे,परेशान किये जा रहे थे।सत्तर साल बाद उस आज़ादी के ज़ायके के लिए हम सब लड़ रहे हैं।गौरी शंकर पहली महिला हैं जिनकी आहुति इस यज्ञ में ली गई है।उन्हें मारने वाले,उनकी हत्या पर जश्न मनाने वाले,जश्न को मुस्कुराहट के साथ समर्थन देने वाले,समर्थन देने वालों के कँधे से कन्धा मिलाकर चलने वाले आज खुशियाँ मना लें।
यक़ीन जानो अंग्रेज़ भी अपने बॉल रूम में ऐसे ही जश्न मनाया करते थे।मगर वक़्त,हर बेइंसाफी को बेआबरू करता है।करेगा।तुम देखना तुम सबके राक्षसी रूप के सामने हममे से एक भी न झुकेगा,न दबेगा।मर जाएँगे,मिट जाएँगे,मगर अंत तक देश में मोहब्बत,समर्पण,त्याग,लोकतन्त्र,आज़ादी,बारबरी सबके लिए खड़े रहेंगे।जानते हैं क्यों,क्योंकि गौरी लंकेश से हमे ऊर्जा मिल रही है।सैल्यूट गौरी दी...
No comments:
Post a Comment