Friday, September 15, 2017

बुढ़ापा

हमारे पेशाब की धार दूर तक जाती है।दूसरा मेरी तुमसे दूर।तीसरा मेरी देख सबसे दूर।तीन हमउम्र अल्हड़ भाई, दोस्ती के अंदाज़ में बड़े हो रहे थे।पेशाब की धार उनके जीतने हारने का पैमाना थी।फिर थोड़े बड़े हुए।स्कूल टेस्ट के नम्बर और रिज़ल्ट की मेरिट ने ले लिए।पहला मेरे नम्बर देख हिंदी में सबसे ज़्यादा,दूसरा मेरे मैथ में देख हिंदी जैसे सब्जेक्ट के मुकाबले मैथ में हाईएस्ट हैं,तीसरा अमा छोड़ो फिज़िकल में मेरे सबसे ज़्यादा हैं, फिजिकली जो मज़बूत वह ही तो शहनशाह।

बड़े होकर नौकरी का ग्रेड आ गया फिर बीवियों का वज़न,रँग और बीवी के ख़ौफ़ में कम्पटीशन होने लगा ।पचास पार करके फिर गिनतीयाँ चालू।अब यही तीनों बिस्तर पर लेटे लेटे शुगर का मुकाबला करते हैं।पहला मेरी 80 निकली थोड़ी कम है।दूसरा मेरी 300 है सबसे ज़्यादा।चौथा यार मेरी 20 है,फिजिकली पहली बार इतने कम नम्बर आए हैं।तीनो ठहाका मारते हैं।

उनके बीच से एक ऊपर निकलता है, दो याद करके उसकी उम्र और हरकतों का गुणा भाग करते हैं।बिना रोए पेशाब की धार से बदपरहेज़ी तक की शिकायत करते हैं।अपने दिल में ही अंदर अंदर ख़ामोशी से धड़कन गिनकर गिनती के दिनों को गिनते रहते हैं।कितना अजीब है न एक ही आँगन में तरतीब से पैदा होते बच्चे बेतरतीब मरते जाते हैं।कोई पहले आया तो अभी भी बिस्तर पर ब्लड प्रेशर की मशीन के साथ अपने को ज़िंदा रखने का झाँसा दे रहा तो कोई देर में आया मगर पहले जाकर खुटका दे गया।ज़्यादा दिन ज़िंदा रहने के यही तो सज़ा है की बहुत सारे अपनों की मौत का ग़म झेलना पड़ता है।

जब मैं कोई बूढ़ा देखता हूँ तो झट से उसके बचपन में पहुँच जाता हूँ।उसके बचपन की शरारतों को कल्पना में उतारता अपने बुढ़ापे में चला जाता हूँ।जब कोई नही होगा,तब क्या करूँगा।फिर बेफिक्र हो जाता हूँ की शुगर नापूंगा, ब्लड प्रेशर नापूंगा और हैशटैग को पढ़ता मुस्कुराता रहूँगा,उसपर के कमेंट पढूँगा और गिनूँगा की अब तक कौन कौन कम हो गया,कितने बेहतरीन कमेंट करने वाले अनंतकाल में चले गए।यही गिनता गिनता धड़कन खुद बखुद घट जाएँगी और सब कुछ हो जाएगा खामोश,नीम खामोश,शाँत.....

No comments:

Post a Comment