हाँ तो जब वह दोबारा लोकसभा के लिए चुने गए तो उन्होंने अपनी धार और तेज़ करली।अपनी ही सरकार के गलत कामो की आलोचना करने लगे।उनकी आलोचना में इतना दम था की वर्तमान वित्त मंत्री टी टी कृष्माचारी को इस्तीफा देना पड़ा।वह नेहरू जैसा व्यक्तित्व था जो अपने इर्द गिर्द बोलने वालों को रखते थे,अलीचकों की इज़्ज़त करते थे।वह फ़िरोज़ गाँधी थे जो गाँधी जी के दिखाए सत्य और ईमानदारी के मार्ग से कभी नही डिगे।अपनी ही सरकार के सत्य मार्ग से पाँव डगमगाते देख टोक देते थे।
कई साल जेल में गुज़ारने वाले फ़िरोज़ जब लखनऊ में नेशनल हेराल्ड के एडिटर बनकर आए तो यहीं से पहली लोकसभा में भी पहुँचे।एक पारसी परिवार का चश्म ओ चिराग हमारे स्वतन्त्रता आंदोलन में अपना सब कुछ छोड़ जुटा रहा।स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स,लन्दन में अन्तर्राष्ट्रीय कानून का होनहार विद्यार्थी भारत के गाँवो में आज़ादी की अलख जगत धूल फाँखने लगा।मुम्बई की आलीशान इमारत को छोड़ वह गंगा के किनारे आज़ाद मुल्क़ के ख्वाब तैराता रहा।महात्मा गाँधी की अपने ऊपर अमिट छाप लिए फ़िरोज़ गाँधी ने बहुत सी मिसालें कायम की,आज उनका जन्मदिन है।
ताज्जुब है कल विनोबा का जन्म हुआ था,आज फ़िरोज़ का,दोनों पर छाँव गाँधी जी की ही तो थी।गुज़रे हफ़्ते फ़िरोज़ की पुण्यतिथि भी थी।जब मैं फ़िरोज़ को देखता हूँ तो लगता है इतने बड़े बड़े चरित्रों के इर्द गिर्द रहकर अपनी पहचान बनाए रखना किस क़दर मुश्किल रहा होगा।यह तो फ़िरोज़ का किरदार था जो चीख़ चीख़ कर उनकी ईमानदारी,उनके त्याग,उनके समर्पण को बताता रहा।देश से मोहब्बत करने वाले जानते हैं की इस देश की आज़ादी में किसका किसका पसीना बहा है।कौन कौन इसकी नीव में है।
फ़िरोज़ गाँधी हमारे देश की बुनयाद की एक मज़बूत ईंट हैं।आज जन्मदिन पर बेहद याद आ रहे फ़िरोज़ की काश कोई आपके जैसे होता और अपनी ही सरकार में जनता की टीस को उठा पाता, वह भी बिना डरे,बिना परवाह के,काश कोई नेहरू जैसा भी होता जो फ़िरोज़ के उठाए सवाल से विचलित न होकर उसपर बात करता।फ़िरोज़ गाँधी का चरित्र ही तो सन्देश है, लोकतन्त्र का सन्देश।
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