आजके मेरे लफ्ज़ सिर्फ उनके लिए है जिनके लिए समाज कुछ है।जिसके लिए उन्हें जीना है।उनके लिए सिर्फ दो लफ़्ज़ हैं सुधार या सेवा।सेवा को हमेशा सराहा गया जबकि सुधार को गालियाँ मिली।हर आदमी सेवा चाहता है मगर सुधरना नही।जो नए नए लोग थोक के भाव में समाज की फ़िक्र कर रहे हैं, वोह अपनी कूव्वत के हिसाब से अपने रास्ते तय कर लें।अगर हल्के मिजाज़ के हों,वक़्ती मेहनती हों और कमज़ोर दिल के हों साथ ही खुद के शौक़ भी न मारने हों तो वोह समाज सेवा का कुछ वक़्त रास्ता अपना लें।
रोटी,कम्बल,किताबें,दवा,कपड़े,खाना,शरबत बाँटे।यह भी बेहद अहम् है जो दूसरे नही कर रहे हैं।आप उन सबसे बेहतर हैं जो घर में मगरमच्छ की तरह लेटे हैं।उनसे भी बेहतर हैं जो सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने लिए ज़िंदा हैं।
अब बात आती है समाज सुधारक की,तो बड़े गौर से सुनो।यह रास्ता बेहद कठिन,पथरीला और उबड़ खाबड़ है।यह भी गारन्टी नही की तुम्हारे सामने सुबह होगी या तुम्हारे जैसी सैकड़ों नस्ल के खत्म होने के बाद सुबह आएगी।इस रास्ते में तुम्हारा ही समाज तुम्हे रत्ती भर मोहलत नही देगा।तुम्हारे कपड़े फाड़े जाएँगे,कालिख़ पोती जाएगी,समाज अपने दिमाग से मिलते हुए जानवर पर तुम्हे बैठाएगा और तुम पर ठहाके मारकर हँसेगा।
इसलिए कह रहा हूँ समाज सेवा को पकड़ो उसमे वाहवाही भी मिलेगी और अख़बार के चिकने पन्नों पर सुंदर तस्वीर भी छपेगी मगर भूलकर भी समाज सुधारक मत बनना।
हाँ अगर तुम्हे रात में नींद न आए।तुम्हे सन्नाटे में मासूमो की चीखें सुनाई दें।तुम्हे चमकदार फर्श और ऐसी में घुटन लगे।तुम्हे समाज में लगी गाँठे चुभें।तुम्हे दिल की दरारे दूर से दिखने लगे।तुम्हे भगवान की चौखट पर अमीर गरीब का फ़र्क दिखने लगे।तुम्हे मस्जिद में अमीर का रौब और गरीब की सिकुड़न दिखने लगे।तुम्हे मज़हब किसी मज़लूम के लिए फंदा दिखने लगे।तुम्हे लड़की के मन की चिटखन दिखने लगे तो उठना और शीशा देखना।अपना बदन देखना।अपनी ताक़त देखना।सबसे पहले तुमसे तुम्हारी ही ड्योढ़ी लड़ेगी।अगर उससे लड़ने की हिम्मत हो तो निकल जाना सुधारने।टूटकर बिखर जाओ समाज में।अपने आप को भूल जाओ एक दिन यह ज़माना तुम्हे याद करेगा।
मेरी आवाज़ सुनों।समाज सेवक बनोगे तो लोग तुम्हारे सामने ईनाम और शोहरत से नवाजेंगे,मगर ज़्यादा याद नही रखेंगे।हाँ अगर समाज सुधारक बनोगे तो इस ज़िन्दगी में तो पता नही मगर हमेशा हमेशा के लिए पीले पन्नों में दर्ज हो जाओगे।अपने रास्ते जल्द तय करो।यह दोनों रास्ते आम नही हैं।दोनों के लिए दिल,ईश्वर अपने हाथ से बनाता है।तुम भीड़ का हिस्सा नही हो,क्योकि तुम्हारे दिल में खुशबू है।तुम्हे ज़रा भी दूसरे की फ़िक्र है तो यक़ीनन तुम खास ही हो.....
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