हो सकता है इन तीनों के नाम बहुत से लोग पहली बार पढ़ रहे हों।इसमें कोई बुराई भी नही,हममे से तो बहुत लोग अपने ही बाबा के ऊपर के नामों को नही बता पाएँगे,यह तो देश बनाने वाले लोग हैं, इन्हें कितना याद करना।नगेन्द्र बाला और हेनरी कॉटन का आज जन्मदिन है और हाँ जतीन्द्रनाथ जी की पुण्यतिथि है।अब पूछियेगा यह कौन हैं, यह भी हमारे देश की वही बुनयाद हैं जिनपर अभी तक हम मुस्कुरा पा रहें हैं।फुर्सत हो तो पढ़िए,ज़्यादा नही लिख रहें,बस इतना बता रहें हैं की आप तीनों को याद करके नमन तो लिख ही सकें।
नगेन्द्र बाला भारत में पंचायती राज लागू होने पर कोटा,राजस्थान की पहली ज़िला प्रमुख थीं साथ ही देश की पहली महिला ज़िला प्रमुख भी थीं।भारत छोड़ो आंदोलन में कई साल जेल में रहीं।राजस्थान में महिलाओं को राष्ट्रीय आंदोलनों से जोड़ा और जब महात्मागांधी की शहादत हुई तो उनका अस्थिकलश भी नगेन्द्र बाला ही राजस्थान लेकर आई और उसे चम्बल नदी में प्रवाहित किया।विनोबा के भूदान आंदोलन में अपनी ज़मीन तो दान ही की साथ ही सैकड़ों से दान भी करवाई।राजस्थान की माटी में जन्मी नगेन्द्र बाला ने अपने त्याग,समर्पण और साहस से पूरी भारत भूमि को महका दिया।आज उनका जन्मदिन है।ज़रा सा ही सही याद तो कर ही लीजिये।
जतीन्द्रनाथ दास यानि जतिन दा महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन से देश के स्वतन्त्रता संग्राम से जुड़े।भगत सिंह और सुभाष चन्द्र बोस के बेहद करीब रहे जतिन दा।जो बम बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने केंद्रीय असेम्बली में फेका था,वह जतिन दा का ही बनाया था।जब वह जेल भेजे गए तो वहाँ फैली अव्यवस्था और क्रांतिकारियों से होते बर्बर बरताव के विरुद्ध उन्होंने जेल में अनशन कर दिया।गाँधी जी के साथ सीखा अहिँसा का रास्ता यहाँ जतीन्द्र दा ने अपनाया।55 दिन के लगातार भूख हड़ताल के बाद अंग्रेज़ों ने नाक में नली डलवाकर ज़बरदस्ती दूध देने की कोशिश की मगर उन्होंने उसे दाँत से जकड़ लिया।ज़बरदस्ती दूसरी नली डाली गई जिससे दूध ज़बरदस्ती डाला गया।जो पेट में ना जाकर सीधे उनके फेफड़ों में चला गया।इससे उन्हें निमोनिया हो गया और यही अनशन के हालत में इस महान क्रांतिकारी ने आज के ही दिन जेल की सलाखों के पीछे दम तोड़ दिया।यह आज़ादी ऐसे नही मिली है, बहुतों का ख़ून बहा है इसमें।यह सब शहीद होने वाले अगर आज हमे हिन्दू मुसलमान के नाम पर लड़ते देखते तो कितना मायूस होते।
न्यू इंडिया,यह आज वाला नही बल्कि 1900 वाला और इंडियन एन्ड होम मेमोरीज़ लिखने वाले हेनरी कॉटन भी हमारे लिए ख्वाब बुन रहे थे।भारत में रहकर भारत की अपनी पहचान के लिए लड़ रहे थे।इंग्लैंड से थे मगर दिल भारत के लिए धड़कता था।हेनरी चाहते थे भारत अपने पैरों पर खड़ा हो क्योंकि भारत के पास अपनी मज़बूत विरासत है।उनकी इसी ख्वाहिश ने उन्हें कॉंग्रेस से जोड़ा और उनकी लगन से वह काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बने।अपने वक़्त में बंगाल विभाजन पर लम्बी बहसें की,भारतियों की भारत के लिए वकालत भी की और अंत तक जब वह लन्दन लौटे तब भी भारतीय संगठनो के साथ ही जुड़े रहे।हेनरी कॉटन ने अपने राष्ट्र को मानवता और स्वतन्त्रता के मुद्दे पर नकारा और कहा की हमे नैतिक हक़ नही की हम किसी की साँसों को गुलाम करें।दूसरों की ज़िंदगियों पर पहरे बैठाएं।अब ज़रा सोचिये हममे से कौन है जिसमे हेनरी के इतना साहस हो,जो अपना हो या पराया उसके गलत को गलत कह सके।काँग्रेस भी क्या लाजवाब विरासत रखे है।
सच पूछिये तो इन पर अलग अलग लिखने वाला था।मगर पढ़ता ही कौन।बस इतना ही जान लीजिये और याद रखिये यह ही बहुत है।एक बार जब चमचमाती सड़क पर फर्राटा भरती गाड़ियों से चलियेगा तो याद रखियेगा इतने बेहतरीन दिन किसकी वजह से मिले।जब भरे हुए पेट से खाए अघाए आपस में लड़ियेगा तब याद कीजियेगा की क्या इस दिन के लिए आपसे पहले के लोग शहीद हुए थे।जब धर्म,जाति, पार्टी,विचार के नाम पर एक दूसरे के कुर्ते फाड़ियेगा तब मत भूलियेगा के आपको एक करने के लिए कौन कौन सलाखों में बिना सूरज देखे ही मर गया।
सत्तर ही साल हुए हैं मगर हमारी याददाश्त,हमारी हरकतें ऐसी हैं की लगता है शहादतें सात सौ साल पुरानी हैं।इतनी जल्दी मत भूलिए।रोज़ हाँ रोज़ याद रखिये इस खूबसूरत मुल्क़ की बुनियाद हर एक की कोशिशों से रखी गई है।सत्तर साल पहले के पन्नों में दफ़न नगेन्द्र बाला, जतीन्द्रनाथ और हेनरी कॉटन जैसों को याद रखिये।इन सब पर पड़ रही गाँधी की छाँव को याद रखिये।हर उसको याद रखिये जो हमारे आजके सूरज के लिए कल बन्द कोठरियों की सलाखों में रहा है।
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