Tuesday, October 17, 2017

भात दे दो

यह क्या आज फिर आसमान खूब चमक रहा था।पूरा रौशनी से नहाया हुआ।हल्का हल्का सा संगीत बज रहा था।संगीत पर खूबसूरती थिरक रही थी।सभी देवतागण उसके मज़े ले रहे थे।
आसमान पर कुबेर ने दावत दी थी।ज़मीन से आसमान तक के हर मशहूर पकवान का इंतेज़ाम था।आने वाले हर मेहमान की ख्वाहिश के खाने का इंतेज़ाम किया गया था।सोने से कढ़े कपड़ों में कुबेर हर मेहमान की मेहमानवाजी कर रहे थे।

कहतें हैं की हर साल होने वाली कुबेर की इस दावत में हर धर्म के प्रतिनिधि आते हैं।दुनिया भर के हर धर्म का प्रतिनिधि इस खूबसूरत दावत का हिस्सा बनकर खुद में फूला नही समाता था।
देर रात खाने की शुरआत हुई।एक लम्बा दस्तरख्वान लगाया गया।सभी मेहमान एक साथ हँसते मज़ाक करते हुए खाने की तरफ बढ़ने लगे।खाने की खुशबू उन्हें और करीब ला रही थी।सभी धर्म के लोग मिलकर खूबसूरत दावत के मज़े ले रहे थे।

खाने की शुरुआत करने के लिए जैसे ही कुबेर ने हाथ बढ़ाया की,उन्हें दरवाज़े पर दरबान के लड़ने की आवाज़ सुनाई दी।दावत का मज़ा किरकिरा न हो इसलिए उन्होंने वहीं से आवाज़ दी,क्या बात है दरबान यह शोर काहे का।उधर से आवाज़ आई मालिक एक लड़की आपसे मिलना चाह रही है।उसे समझा रहें हैं की अभी मत जाओ,मगर मान ही नही रही,बड़ी ज़िद्दी है।
सब मेहमानो की आँख देख कुबेर को लगा,बुला लेना चाहिए,आखिर देवता ही तो हैं सब,हमे उसको सुनना चाहिए।कुबेर ने उसे भेजने को कहा।

जब लड़की उनके  बीच आई तो कुबेर ने पूछा क्या बात है बेटी,कोई समस्या।उसने हाँ में सर हिलाया और कहा भूख लगी है।खाने की खुशबू से मैं कहाँ से कहाँ टीक आ गई,पता ही नही चला।माँ की गोद में थी,एकदम से खाने की खुशबू आई और मैं चल दी।रास्ते में सब घर झाँके,सारी नदिया देखी, समन्दर देखा,महल देखे मगर कहीं खाना नही था।खुशबू के पीछे भागती भागती यहाँ तक आ गई।

कुबेर हँसे,हज़ारों तरीके का खाना सामने लगा था।बोले बेटी,यहलो,यहाँ जो भी खाना तुम्हे पसन्द आए ले लो और सब घर वालों के लिए ले जाओ।कुबेर के यहाँ भला किस चीज़ की कमी,तुम सही जगह पहुँच गई।बोलो तुम्हे क्या चाहिए।लड़की ने कहा भात,मुझे भात चाहिए,सिर्फ भात।उसके बोलते ही हर मेहमान के गले से उतरता खाना अटक गया।वह खड़ी बोले जा रही थी की मुझे भात चाहिए।कुबेर के पास हज़ार पकवान तो थे मगर वह भात नही थे जो उसे चाहिए था।वह भात भात करती रही,उसकी आवाज़ से संगीत थम गया।आसमान की रौशनी धीमी होती चली गई और सब मेहमानो की भूख मर गई।वह फिर भी कह रही थी मुझे भात चाहिए।भात भात कहती वह ज़मीन से आसमान तक आई,अब आगे जा रही है शायद भात मिल जाए,कभी,कही..

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