Sunday, October 8, 2017

महाप्रलय

कल जब प्रलय आएगी।वह प्रलय नही जो पति पत्नी के झगड़ो में आती है।वह प्रलय भी नही जो शैव और वैष्णव के लड़ने से निकली।वह प्रलय भी नही जो बौद्ध और हिन्दू के युद्ध से आए।वह प्रलय भी नही जो हिन्दू और मुसलमान के लड़ने से आए।वह प्रलय भी नही जो बौद्ध और मुसलमान के लड़ने से आए।वह प्रलय भी नही जो यहूदी और ईसाई के लड़ने से आए।वह प्रलय भी नही जो दलित और संवर्ण के झगड़ों से उत्पन्न हुई हो।वह प्रलय भी नही जो पुरुष किसी महिला के जीवन में लाता है।वह प्रलय भी नही जहाँ सर से माँ बाप का साया उठ गया हो।वह प्रलय भी नही जहाँ बच्चों की शक्ल में घर के चिराग बुझ गए हों।हिरोशिमा से आग उगलती ज़मीन वाली भी प्रलय नही।कुरान,बाइबिल या दूसरी किताब वाली भी प्रलय नही।कल जब प्रलय आएगी तब यह सारे क़िस्से भी नही रह जाएँगे।यह किताबे भी नही रह जाएंगी।

मैं जिस प्रलय की बात कर रहा हूँ उसके बाद तुम्हारा हज़ारों वर्षों का चमकीला,भड़कीला,रसीला,जटीला,
कटीला इतिहास , जब इतिहास भी नही रह जाएगा।मैं जिस प्रलय की बात कर रहा हूँ वह जानते हो कैसी होगी।यह पृथ्वी बिल्कुल किसी गहरी नींद में सोई हुई लड़की की तरह बिस्तर पर एक करवंट बदलने की प्रक्रिया में करवट बदलेगी और सब खत्म हो जाएगा।यह पृथ्वी अपने ऊपर जमी हज़ारों साल पुरानी खाल को जब उतार फेंकेगी तो उस खाल के साथ हम तुम,हमारे तुम्हारे सब गुम हो जाएँगे।

इस धरती की करवट ही तो वह प्रलय है जिसे मैं देख रहा हूँ।जो आज कुछ करके महान बनना चाहते हैं या बहुत कुछ खुद को अमर करने के लिए कर रहें हैं।यह सच है उस प्रलय के बाद सारी अमरता धरी की धरी ही रह जाएगी।पृथ्वी उस सूख चुकी खाल में हमारे हर आदर्श को सुखा डालेगी।
इस प्रलय के बाद ईश्वर भी तो नही ही रह जाएगा।पृथ्वी फिर इंसान गढ़ेगी,इंसान फिर ईश्वर गढ़ेगा, नई सृष्टि का नया निर्माता भी तो बनाया ही जाएगा।मैं जिस प्रलय को देख रहा हूँ वह बड़ी ही खूबसूरत है।वह धरती में नीचे दबे हर अवशेष को खत्म करदेगी,जिससे हमारे या तुम्हारे होने की  निशान हो।

यह प्रलय समानता से सब समान कर देगी।इंतज़ार करो,जब पृथ्वी अपनी खाल उतारेगी तो तुम्हारी सारी पवित्र अपवित्र किताबें भी खत्म हो जाएँगी और फिर कोई नए लोग आएँगे।जो लड़ने के लिए इतिहास से मसाला नही निकाल सकेंगे क्योंकि वह हमारी तरह बदकिस्मत नही होंगे,जो इतिहास को देख देख वर्तमान में ख़ून बहाएं।वह लोग तो रोज़ अपने आप में तब तक मिलजुलकर रहेंगे जब तक उनमे से ताकतवर के पेट न भर जाएँ,फिर यह भी सच है, वह भी आगे चलकर ऐसे ही आने वाली प्रलय के बीज बोते जाएँगे।यह ज़मीन फिर करवट लेगी....

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