Thursday, October 19, 2017

गद्दाफी

वह खड़े होकर जब महल में चीखता था,तो आवाम डर जाती थी।उसके मुँह से निकला हर जायज़ नाजायज़ फैसला कानून बन जाता और अवाम उसे पलके झुका कर मान लेती।यह अवाम भी अजब चीज़ है जब पलकों पर बिठा लेती है तो हर बात पर सर झुका लेती है।पलकों पर बैठने वाला सर पर बैठकर मगरुरियत से उसी अवाम को तहस नहस करने लगता है।यह ताक़त का नशा होता है।हर उसमे यह ताक़त का नशा आ जाता है जो हल्के मिजाज़ का होता है।

यह भी सच है जब यही अवाम पलके बन्द करती है तो ऊपर बैठा इंसान,जो खुद को ख़ुदा समझने लगता है।एक झटके में अवाम के पाँव के नीचे आ जाता है।यही तो हुआ मुअम्मर गद्दाफी के साथ,याद कीजिये आजके ही दिन,अपने ही लोगों के पाँव के नीचे दम तोड़ा था।वह अवाम आज उसे दौड़ा दौड़ा कर मार रही थी,जो कल तक उसके हर अल्फ़ाज़ को कानून समझती थी।

वैसे गद्दाफी के मौत के बाद भी भले लीबिया सम्भला न हो,भले और बुरे हालात में चला गया हो फिर भी उसने अपने घमण्डी,बेकाबू,बेलगाम बादशाह को अपने पाँव के नीचे कुचलकर मार डाला।

दुनिया में हर उस व्यक्ति को गद्दाफी से सीखना चाहिए,जो करोणों दिलों में राज करता हो।अगर उसमे घमण्ड आया,घमण्ड में जनता पर ही अनाप शनाप फैसलों से अत्याचार शुरू हुआ,महलों के हज़ारों पकवान की खुशबू, झोपड़ी में हफ्तों से भूखे बच्चों की नाक में जाने लगे और उसके समर्थक अत्याचार के शिखर पर खड़े होकर ठहाके लगाएं,तो यक़ीनन वह बादशाह पलकों से गिरने ही वाला है।
और हाँ यह समझ लो,यह अवाम एक भीड़ है, जो भाग रही है, इसके सामने एक बार गिरे नही की कुचल कर मर ही जाओगे।इसलिए हर बादशाह को अपनी अवाम के धैर्य का इतना इम्तेहान नही लेना चाहिए की अवाम का डर और मोहब्बत दोनों ही खत्म हो जाए।

No comments:

Post a Comment