Wednesday, August 14, 2019

आज़ादी का जश्न

वक़्त निकाल कर कलकी खूबसूरत सुबह से पहले पढ़ें,मुझे यह सारे नाम याद थे,उनके काम याद थे मगर पहले कभी कहने की ज़रूरत नही महसूस हुई । कल जब आज़ादी की सुबह का सालाना जश्न आएगा,तब अब के माहौल में इनको दोहराना,हमे ज़रूरी लगता है ।कल जब आज़ादी की सुबह मुस्कुराहट के साथ मुबारकबाद दीजियेगा तो ,बेगम हज़रत महल की क़ुरबानी को याद करिएगा।अज़ीज़न की आहट सुनियेगा ।असगरी बेगम की मेहनत,हबीबा की हिम्मत,रहीमी का त्याग,बी अम्मा की ख़िदमत,बेगम निशातुन्निसा की तड़प,अमजदी बेगम का हौसला,सआदत बानो किचलू का औरतों को जगाना शिद्दत से याद करियेगा ।

बेगम खुर्शीद ख्वाजा का आज़ादी का परचम थामना
ज़ुलैखा बेगम का मौलाना आज़ाद को हिम्मत देना
ज़ाहिदा खातून शेरवानिया का इकट्ठे हुक़ूमत को ललकारना,ख़दीजा बेगम का उठकर सल्तनत की चौखट उधेड़ना को याद कीजियेगा ।

ज़ुबैदा बेगम दाउदी का घर से निकलना,कनीज़ सैयदा बेगम का जुलूस को हवा देना,मुनीरा बेगम के अल्फ़ाज़ से बिरतान का दरकना,इस्मत आरा बेगम की खनक से वर्दी का उधड़ना,सुगरा खातून की हिम्मत के आगे ग़ुरूर को घुटनों के बल बैठना याद कीजियेगा ।

बीबी अमतुस्सलाम का गाँधी की बेटी बनकर ज़िन्दगी को सर्फ़ करना और नोआखाली में दंगो में मन्दिर से माँ दुर्गा की मूर्ति से चोरी हुई तलवारों को मुसलमानो से वापिस लाने के लिए पच्चीस दिन उपवास करना,उपवास से तलवारों की वापसी के साथ हिन्दू मुसलमान का दिल जुड़ जाना ,आमना कुरैशी का इंक़िलाब ज़िंदाबाद को थाम लेना,फ़ातिमा अरीज़ी का अंग्रेज़ों के दाँतो को खट्टा करना,बेगम सकीना लुक़मानी का बिरतानियों का मज़ा किरकिरा करना,रेहाना तैय्यब जी का नई नस्ल की परवरिश का,हमीदा तैय्यब जी का आज़ादी की मतवालों को कन्धा देना,फ़ातिमा तैयब अली का हौसले और हिम्मत को बढ़ाना,सूफिया सोम जी का अपने जैसी हज़ारों को सड़क पर निकलना,शफ़ाअतुन्निसा बीबी के अल्फ़ाज़ से हुकूमत को दहकाना ,बेगम माजिदा बानो की तरह सबका साया बनना शिद्दत से याद कीजियेगा ।

बेगम कुलसूम सायानी का ज़िन्दगी की लज़्ज़त छोड़ आज़ादी की डगर पर कंटीले रास्तों पर चलना और बाद में भी बिना थके नई तालीम को उभारना,बेगम सुल्ताना हयात अंसारी का तमाम औरतों को इकट्ठे करके मुल्क़ की ख़िदमत के लिए तैयार करना,हाज़रा ज़ेड अहमद को अपनी शफ्फाक चादर छोड़ ज़मीन पर काम करना,ज़ोहरा अंसारी की ताज़गी और हिम्मत देती पुकार को कल सुनियेगा ।

बेगम अनीस क़िदवई का बंटवारे में तड़प रहे दिलों पर मरहम रखना,खुद कब्र खोदकर लाशों को दफ़नाना और इस दफनाने में दंगो में शहीद हुए अपने शौहर का गम भूल जाना । माई बख्तावर का मुल्क़ की सुबह के लिए रात भर जागना,माजिदा हसीना बेगम का घरों में आज़ादी की बेचैनी उभारना,ज़हीरा बेगम का जूझना,सुल्ताना बेगम का खुद को मिटाने की हद तक लड़ना,फ़ातिमा बेगम का आज़ादी के परचम को लहलहाना,बेगम सूफिया अब्दुल वाजिद का हर उस दिल को करीब करना जो आज़ादी के लिए बेचैन है,कल की सुबह हर एक को याद करना ।

लिखने को तमाम दूसरे नाम लिखे जा सकते हैं, हर उसकी ख़ून की बून्द का एहसान हम पर है जो इस संग्राम में शहीद हुआ ।हमने तो अपने घरों की उन औरतों का ज़िक्र किया जो ज़िक्र में ही नही आती ।जिनके मज़हब से नफ़रत का एक पूरा मिशन चलाया जा रहा ।जिन्हें गाहे बगाहे ज़लील किया जा रहा ।चुटकी भर नाम ही लिखे हैं तफ़सील में नही गए हैं ।यह औरते खुद निकली और आज़ादी के हर हिस्से के लिए लड़ती हुई गुमनाम खत्म हो गई ।देश के हर स्वतन्त्रता सेनानी को नमन करिये क्योंकि सिर्फ उनकी हाँ सिर्फ उनकी वजह से यह खूबसूरत आज़ाद सुबह हमे मिलेगी ।इन्होंने माफियाँ नही माँगी, मुखबरी नही की,बल्कि डट कर मुकाबला किया,लड़ते हुए देश को आज़ाद करवाया ।कल बेगम हजरत महल से सुभद्रा जोशी तक सबको याद कीजिये,कर्तव्य है हमारा और वह भारत बनाने में लगिए जो इनकी आँखों में था,जो सबके लिए है, जहाँ धर्म के नाम पर किसी को इतनी छूट न मिले,की उसके हाथ खून से रँग जाएँ । हमे सम्रद्ध,विकसित,प्रेम और वैज्ञानिक सोच का महान भारतवर्ष बनाना है...

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