जो मेरी आँख में आँसू लाते हैं, ऐसे आँसू जो करुणा से निकले हों । जो मेरे दिल को नरम करते हैं, ऐसी नरमी जो हर इंसान के लिए हो । जो मुझे मेरे मार्ग पर विचलित हुए बिना चलने का साहस देते हैं, वह कान्हा हैं ।
मैं मीरा नही हूँ,मैं सूर भी नही हूँ,मैं रहीम या रसखान भी तो नही हूँ । मैं अपने कान्हा को पाने वाला बेहद साधारण सा जीव हूँ, जिसमे कोई खूबी नही,कोई फ़न नही,जिसे तो यह भी नही पता कि प्रेम कैसे किया जाता है । मैं तो बस अपने फूहड़पन से कान्हा को चाहता हूँ, जैसे करोणों लोग चाहते होंगे । मेरा और कान्हा के सम्बंध असाधारण नही बल्कि बेहद साधारण है । मैं मुस्कुराता हूँ और वह मुस्कुरा देते हैं । बस ।
मैं कान्हा के जीवन का न तो सुदामा हूँ, न ही राधा हूँ, न ही रुक्मणि हूँ ,न ही बलराम हूँ और न ही अर्जुन हूँ । मैं तो बस इस पूरे ब्रह्मांड में सुई की नोक के करोणोंनवे हिस्से से भी छोटा कान्हा का एक प्रेमी वाला हूँ ।
जिसकी कोई औकात नही,जिसकी कोई पहचान नही,जिसमे कुछ भी ऐसा नही जिसे उभारा जा सके । इसके बावजूद मेरा हृदय वह है, जिसमे कान्हा वास करते हैं । मेरे मस्तिष्क वह है, जिसे कान्हा दिशा देते हैं । मेरे पांव वह हैं, जो कान्हा के इशारे समझते हैं । मेरे हाथ वह हैं, जो कान्हा की सुनते हैं ।
मैं अपने कान्हा को,अपने अन्दर मरते दम तक जीवित रखने की लालसा में जिये जा रहा हूँ । जिस दिन मेरा मन न्याय,त्याग,समर्पण,सहयोग,प्रेम,बन्धुता से डिग गया,उस दिन मेरे अंदर से कान्हा निकल जाएंगे और रह जाएगा तो केवल एक जर्जर खंडहर नुमा शरीर ।मेरा हर कदम इस शरीर मे कान्हा को रोके रखने के लिए है । ऐसे ही कान्हा हर उस शरीर मे हैं, जिसमे प्रेम है । जहाँ नफरत है, वहां कान्हा तो क्या,कान्हा की छांव भी नही है ।
जन्माष्टमी आएँगी और जाएँगी । असली जन्म तो हृदय में होता है । कान्हा ने जिसके घर की जगह हृदय में जन्म ले लिया,समझ लो,उसे मानवता की सेवा के लिए चुन लिया । जिसके हृदय में कान्हा की किलकारी गूंजी,समझ लो वह प्रेम को फैलाने वाला चुना गया है । जिसके हृदय में कान्हा ने पाँव की पहली थाप दी,वह इस धरती को सँवारने वाला बन गया । जन्मष्टमी तो तब है जब समाज की वेदना,संवेदना और फिक्र की प्रसव पीड़ा महसूस करो और समाज को सुखी,समृद्ध और शान्ति के लिए काम करो ।
हर एक कि बराबरी के लिए उठो,अमीर गरीब,छोटा बड़ा,काला गोरा,हिन्दू मुसलमान,मज़दूर मालिक,सबके लिए बराबर से विचलित होना,सबके लिए बराबर से खड़े होना जब आ जाएगा,तब कान्हा हृदय में जन्म लेंगे,यह ऐसी जन्मष्टमी होगी,जो एक बार आएगी और सारे जन्मों का उद्धार कर जाएगी ...जन्मष्टमी की आप सबको मुबारकबाद,कान्हा आपके हृदय तक पहुँचे...
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