Sunday, August 18, 2019

बोलने नही देंगे

बात क्या करते सिवाए शांति, अहिंसा,त्याग और प्रेम के...अयोध्या में युवा सद्भावना शिविर था,जिसे अचानक शासन ने रुकवा दिया । पुलिस अधिकारियों का कहना कि आपका कार्यक्रम सही है, मंशा अच्छी है मगर इस वक़्त यह बातें ठीक नही क्योंकि देश काल की परिस्थितियां इसके अनुकूल नही ।

हमें,सन्दीप भाई, राम पुनियानी जी,अनुराग,आशीष और राजीव भाई को यहाँ सुबह से ही डिटेन कर लिया गया । लखनऊ से चले,अयोध्या की सीमा में टोल प्लाज़ा के गेस्ट हाउस में सड़क पर भारी पुलिसबल लगाकर रोक लिया गया । दिल्ली से अयोध्या पहुँचे सुयशत्रिपाठी,डॉ कुश भाई और जावेद को कैम्प से निकल जाने को कहा गया,आयोजक युगल शास्त्री को हमारे पास लेकर रोक दिया ।

लोकतंत्र पर हमला या इमरजेंसी जैसे हालात कहकर हम चीज़ें परम्परागत नही करना चाहते,आपको विचलित नही करना चाहते । प्रशासन को लगता है कि प्रेम और त्याग की बातों से शांतिभंग हो सकती है, तो हम उनका सम्मान करते हैं । हमे क्या,इस डिटेन किये जाने पर भी किताब पढ़ते रहे ।एक ही तो फिक्र,अपने देश की,उसे यहाँ बैठ सोचते रहे ।

हम तो खुदाई खिदमतगार हैं, हमे नफ़रत ही तो दूर करनी है । आज यह जो हुआ,हम अरेस्ट हुए और वापिस लखनऊ लाकर छोड़े गए,यह ठीक तो नही था । अब युवा शिविर या सद्भावना की बातें आपको डराने लगें,तो लगता है कि शासन में वाक़ई कोई कमज़ोर व्यक्ति बैठा है । हमने तो अब प्रण ही कर लिया है कि इस डर को भी शासन का निकालना है और समाज मे और मधुरता,प्रेम,त्याग,समर्पण लाने में लगना है ।

हम इसको कोई सनसनी नही बनाना चाहते,न ही यह चाहते हैं कि ऐसे हरकतों से कोई हमारे दूसरे कार्यक्रम।प्रभावित हों । हम अब और मज़बूती से पूरी प्रतिबद्धता से आगे भी युवा शिविर,युवा संवाद और यात्राएँ करते रहेंगे । न टूटेंगे न झुकेंगे,न विचलित होंगे,न भय का माहौल बनने देंगे, बस देश मे देश के हर व्यक्ति के लिए बेहतर माहौल बनाने में लगेंगे ।

आखरी बात आपसे नही बल्कि मेरे राम से है, रामजी यह पहली बार हुआ है कि हम आपकी चौखट तक आकर आप तक नही आए, सरयू का पानी छुए बगैर यह हाथ पहली बार लौटे हैं । आप हर उसको माफ कीजियेगा,जिसने यह पाप किया है । मेरी प्रार्थना है कि हमारे हृदय को विशाल तो कीजिये ही,हर उसके हृदय को भी बड़ा कीजिये,जिनका संकुचित हो रहा है । मैं न गुस्सा हूँ, न मायूस हूँ, न दुःखी हूँ, क्योंकि मुझे पता है मैं रामजी के सन्देश को फैला रहा था,जिसे वह और जगह और तरीके और सामर्थ्य से हमसे ज़रूर समाज मे फैलवाएंगे ।

यह गिरफ्तारियाँ, यह रुकावटें मेरे प्रेम के मकसद को और मज़बूत करती हैं । शासन ने जो किया,वह नही करना था,इसकी जरूरत ही नही थी मगर क्या ही कहें,बस प्रार्थना की ईश्वर इनको सद्बुद्धि दे क्योंकि यही देश के लिए ज़रूरी है । देशभर के हर साथी को सैल्यूट जो इसमे अपनी अपनी जगह से साथ देते रहे...

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