ज़ोर से बोलो,सब मिलकर बोलो,तेज़ बोलो,बढ़चढ़ कर बोलो,जो हम कह रहे,वह ही बोलो । ऐसे ही तो सब कुछ गूंज रहा है, ऐसे ही तो हर एक हमारे कानों में कर्कश आवाज़ जिसे वह मधुर संगीत समझ रहा,घुसेड़े दे रहा है ।
पांच दिन बाद बकरीद जैसा महत्वपूर्ण त्यौहार है, हफ्ते भर बाद स्वतंत्रता दिवस जैसा ऐतिहासिक दिन है, मगर वह क़ैद हैं । करोणों लोगों के सर पर पहरा है, क्योंकि करोणों लोगों की दहलीज पर हम सब विकास लाना चाहते हैं । कश्मीर एक बड़ी जेल बन चुका है, न कोई त्योहार की तैयारी न कोई आज़ादी का जश्न,पसरा है तो सिर्फ सन्नाटा ,भयँकर सन्नाटा ।
हम सबको जो करना था कर चुके । कश्मीर को जितना देना था ,दे चुके । सड़क से संसद तक कश्मीर को लेकर फिक्रमंद भीड़ खूब देखी है । उसी भीड़ में गिद्ध भी देखे हैं और सन्त भी ।
जब हम एक कदम आगे बढ़कर चल ही चुके हैं, तो उठिए और कश्मीरियों को एहसास दिलवाइये की हमने दरवाजा खोला है, दीवार नही तोड़ी है । आज कई दिन हो चुके हैं, वहां सब कुछ बंद है, सबकुछ माने सबकुछ,बिल्कुल बंद है ।
हम जश्न मना चुके हों,तो कम से कम अब उन घरों के दरवाजे खोल दें,उनमें सूरज की रोशनी कैद करके हमने उनके लिए विकास चुना है । हमे फ़र्क़ नही पड़ता कि कौन क्या सोचता है, कौन गम मनाता है तो कौन खुशी,मेरी फिक्र बस यह है कि जो भी जहाँ है, उसे इंडियन रिपब्लिक को बांधे हुई नीली किताब से आज़ादी मिलती रहनी चाहिए ।
हम कोसने वाले लोग नही हैं । हमारे हाथ विनाश वाले नही हैं, निर्माण के हाथ हैं । जिन्हें कभी न रुकना है, कभी न थकना है, कभी मायूस भी नही होना है । हमे कबाड़ हो चुकी चीजों से भी काम की चीज़ें बनाना आता है । हम सब मिलकर कश्मीर को अपना बनाकर और खूबसूरत बना ही लेंगे ।
बस अभी फौरन कर्फ्यू हटे,ताकि लोग त्योहार मना सकें,ताकि बच्चे स्कूल जा सकें,ताकि मरीज अस्पताल जा सकें । ताकि मां अपने बच्चों से मिल सके,बच्चे अपने बाप के गले लग सकें । क्या हमारा दिल इतना छोटा और हम इस कदर कमज़ोर हैं कि हमे कर्फ्यू में ही रास्ता दिखाई देता है । कर्फ्यू तुरन्त हटाइये और लोगों को निकलने दीजिये । यह भला कौन सी बात है कि इतनी भारी भरकम सेना लगाने के बावजूद हमे कर्फ्यू लगाना पड़ रहा है । सेना लगी है, तो लोगों को आज़ादी भी दें ।
मैं वाहियात,घिनौने और घटिया लोगों की बात पर कान नही धरता, जो कश्मीर को ले लेकर अपनी बदबूदार परवरिश का झंडा पहरा रहे हैं, उनकी लड़कियों,उनकी दूसरी चीजों पर लार टपका रहें हैं । पता नही यह कैसे अपने घर की बच्चियों को देखते होंगे,ईश्वर ही जाने । हम हर उससे बात करना चाहते हैं, उसकी बात पर तवज्जो करना चाहते हैं, जो कश्मीर पर संवेदनाओं के साथ चिंतन में है कि कैसे कश्मीर को अपनाया जाए । अब जो होना था हो चुका,कश्मीर से कर्फ्यू हटाइये । घाटी को आज़ाद कीजिये,कुछ दिन बाद त्योहार हैं, उसमें यह कैद भयँकर भूल बन जाएगी । समझ से काम लें और बच्चों के दिमाग मे यह मत बैठने दें कि उनके खुशी मनाने के दिनों में उन्हें चार दीवारों में कैद कर दिया गया था ।
कश्मीर में कर्फ्यू हटाएँ और किसी भी हाल में हालात सामान्य करने की कोशिश करे । पूरे देश के इस वक़्त जुटना होगा । हर रक को निर्माण और अपनत्व में लगना होगा । जब दरवाजा खोला है,तो अपना दिल भी खोलें । इस बात की गम्भीरता समझें कि अगर यह कर्फ्यू नही हटा और बकरीद-15 अगस्त कैद में ही निकल गई । तो यह बहुत भयँकर भूल होगी । जिसको हमारी पीढ़ियाँ पाट नही पाएंगी । हमारी सेना लगी हुई है, उसपर भरोसा कीजिये और कर्फ्यू को हटाइये ।
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