Wednesday, August 28, 2019

समाज के लिए रो नही करो

एक योद्धा युद्ध से नही घबराता । एक डॉक्टर मरीज़ों की लम्बी लाइन देखकर नही घबराता । एक शिक्षक सवाल पूछते बच्चों की भीड़ से भागता नही है । एक दानवीर अपने सामने फैले हाथों को देख डिप्रेशन में नही जाता । एक मजदूर ईंटो का ढेर देख पैर नही पीछे करता । जानते हैं, क्यों,क्योंकि इनको जो काम करना है, वह करना है । इन्हें अपने पूरे दिन में जितना हो सके वह काम करके खत्म करना ही है ।

अब आते हैं समाज सेवकों पर,सुधारकों पर,एक्टिविस्ट पर,यह मीटिंग करते हैं । एक दूसरे को घने होते अंधेरे के बारे में बता बताकर रुदाली बनते हैं । वह बड़ा एक्टिविस्ट जो ज़्यादा जल्दी घना अंधेरा महसूस करले और ज़्यादा भयँकर तरीके से बता पाए । अंधेरा बढ़ता रहता है और यह और बकते रहते हैं । फासिस्ट जैसे शब्द हवा में उछलते हैं, तानाशाही के तार बार बार छेड़े जाते हैं । लम्बी लम्बी तक़रीरें होती है मगर नही होता है, तो काम ।
हम सबको इतना समझना चाहिए जितना ज्यादा ज़ुल्म होगा,उतना ज्यादा हमारा काम बढ़ जाएगा । हमे रोना कम और काम ज़्यादा करना होगा । लोकतंत्र खतरे में है, जैसे नदी बाढ़ में खतरे के निशान से ऊपर बह रही कि सूचनाएं नही देनी होंगी । हमे बाढ़ रोकने या आ चुकी बाढ़ से खतरे और नुकसान को कम करने में लगना होगा । अब हम।यह तो नही करेंगे कि नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही,इसिपर ही संगोष्ठी करें,चर्चा करें और यही पर दिन रात एक करदें ।

जिसको लगता है कि वाक़ई देश समाज मे चीजें बदतर हो रहीं । भीड़ बेकाबू हो रही,सरकार का निज़ाम डोल रहा है,पुलिस की पकड़ अपराधियों पर ढीली हो रही,विरोध की आवाजों को दबाया जा रहा,तो संगठित होकर काम कीजिये । हरकत में बरकत है, बोलने से एक वक्त के बाद केवल ध्वनि प्रदूषण ही हाथ आएगा ।

माहौल और बदलते लोगों को देखकर डिप्रेशन में नही जाना है । क्योंकि इस माहौल में डिप्रेशन में आना सबसे आसान है, सबसे मुश्किल है इस माहौल को बदलना । मंचो या सेमिनार हाल में बोलने की जगह,जो जहाँ है वहाँ बात करे । घर,परिवार,दोस्त,संस्थान,क्योंकि इंसान यहीं हैं, जिन्हें सुधरना है ।

जिन्हें लगता है अभी बुरा हुआ ही क्या है, तो वह बुरा होने के अपने मानक लेकर चुपचाप बैठे,जब उनके स्तर का बुरा दिखने लगेगा तब वह अपनी सेवाएँ दे दें,तब तक चादर तान कर सोएँ । समाज मे प्रेम,एकता और सहयोग की भावना को बढ़ाने में लगिये । यही वह सूत्र हैं, जिससे हम देश पर आए कोई भी सामाजिक,राजनैतिक या आर्थिक संकट का मुकाबला कर पाएँगे । ऐसे समय मे जो एकता को तोड़ने का कोई भी कुत्सित प्रयास करे,वही समाज का सबसे बड़ा दुश्मन है ।

परेशान मत होइए,डिप्रेशन में मत आइये,रक दूसरे को कोसिए मत,एक दूसरे के पिछले कामो के कपड़े मत उतारिये,बस एक होइए । हम सब मिलकर,काम करके,चीजों को बेहतर करने का प्रयास कर सकते हैं, हमारे हाथ मे यही है, यही कीजिये,बस । काम कीजिये,जो भी आता है, वह कीजिये,बस लक्ष्य एक रहे, प्रेम,एकता,बन्धुता,अहिंसा,धैर्य...यही धर्म है, यही कर्म है...

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