Saturday, August 3, 2019

किशोर कुमार

मरने की दुआएँ क्यूँ माँगूजीने की तमन्ना कौन करे .... जब ज़िद्दी फ़िल्म से यह अल्फ़ाज़ हवा में तैरे तो खंडवा की ज़मीन महक उठी।मध्यप्रदेश से उठी इस आवाज़ के पीछे सारा ज़माना आता चला गया।बहुत पहले एक चरवाहे का क़िस्सा मशहूर था की वह जब गाना गाता हुआ निकलता तो जानवर,चिड़िया चुनमुन सब उसके पीछे हो लेते और वह उन्हें अपनी आवाज़ से जँगल की तरफ एक साथ लिए चला जाता।यहाँ तक कहा जाता की उसकी आवाज़ अगर इंसान के कानों में पड़ जाए तो इंसान अपने दिमाग का काबू उस गरड़िये को दे जाता।

खंडवा से निकली इस आवाज़ का जादू भी कुछ कुछ ऐसा था।जब ब्लैक एन्ड वाईट दौर की दूधिया रौशनी और फ़िल्म इंडस्ट्री की रूह मधुबाला खुद को काबू में न रख पाई और उस आवाज़ का दामन पकड़ लिया तो अच्छे अच्छे कहाँ ठहरते।

आज किशोर कुमार का दिन है।वही किशोर जो कभी कर्जे की माँग को थाली पर चम्मच मार मार कर कमज़ोर करते थे।पाँच रुपय्या...बारह आना...यह कर्जे की रक़म जब गाने की शक्ल में किशोर कुमार की आवाज़ में उभरी तो उस क़र्ज़ की दास्ताँ को संगेमरमर पर खोदकर दर्ज कर गई।जो कभी नही मिटेगी।

किशोर कुमार का आज जन्मदिन है।मन्ना डे, रफ़ी साहब,लता जी,मुकेश के उस दौर के बीच किशोर कुमार की आवाज़ ने भी अपना अलग रास्ता बनाया।मैं यह बात फ़ालतू समझता हूँ की कौन नम्बर एक है और कौन किसके पीछे।मेरी समझ से सुबह मन्ना डे के साथ तो दोपहर किशोर के साथ तो शाम रफ़ी के साथ तो रात मुकेश के साथ,जो जिस वक़्त सुक़ून दे जाए,वह उस वक़्त का बादशाह।

मुझे कभी इन फनकारों के बीच गिनतियों के लिए लड़ना न पसन्द आया और न किया।यह ठीक वैसा ही वक़्त था जब देश आज़ाद हुआ था।हमारी सियासत की चोटी पर नेहरू,अम्बेडकर,पटेल,आज़ाद,रफ़ी अहमद,राजेन्द्र प्रसाद जैसे लोग उस वक़्त चमका रहे थे जो दौर उनके बाद से आजतक लौटकर नही आया की इतने बड़े लीडर एक साथ एक छतरी के नीचे रहे हों।ठीक वही दौर इंडस्ट्री का था की लता,रफ़ी,मुकेश,मन्ना डे, किशोर कुमार जैसे सितारे एक साथ हों।लगता यह इंडस्ट्री बाँसुरी है और यह सब उसकी आवाज़ निकलने के रास्ते,हर एक का खुला रहना ज़रूरी था।
किशोर कुमार अपनी आवाज़ के साथ हमेशा हमारे दिलों में हैं और रहेंगे।

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