Monday, August 5, 2019

हिरोशिमा

मत पढ़ियेगा वरना आप इंसान बन जाएँगे । जब हिंसा-क्रूरता-नफरत आनन्द देने लगे,तो मेरे यह शब्द न तुम्हे दिखाई देंगे,न सुनाई देंगे और न ही समझ आएँगे.......

"मुझे बेहद दर्द है दोस्त।इतना दर्द की आँखे खुलती नही,साँस नही ली जाती।मैं मुस्कुराना चाहती हूँ मगर दर्द से रो देती हूँ।साँस घुट रही है, मैं तुम्हे देखती हूँ तो तुम बार बार धुंधली क्यों हो जाती हो।मेरे पैर भी अब नही उठते।दोस्त क्या मैं अब मर जाऊँगी।" बारह साल की सडाको सासाकी अपनी दोस्त से रेड क्रास अस्पताल में लेटी कह रही थी।उससे दो साल बड़ी उसकी दोस्त सडाको को बहलाती हुई कहती है की अगर तुम एक हज़ार कागज़ की चिड़िया बनाओ तो तुम ठीक हो जाओगी।ठीक होने के नाम से ही सडाको की आँखों में चमक आ गई।

वह बोली और दर्द भी खत्म हो जाएगा न,तुम मुझे साफ़ साफ़ दिखने लगोगी,उसकी दोस्त ने हाँ में सर हिलाया।उसने अस्पताल के बेड पर रोज़ कागज़ की चिड़िया बनाना शुरू किया।दवा के लिफाफो,पर्चो और दूसरे कागज़ों से वह चिड़िया बनाती रही।जैसे जैसे चिड़िया बनती उसकी तक़लीफ़ बढ़ती जाती।करीब पाँच सौ चिड़िया बनाने के बाद सडाको के हाथो ने काम करना कम कर दिया।नज़र धुंधलाने लगी।गला कसने लगा।फिर भी वह हिम्मत और उम्मीद से लेटी लेटी चिड़िया बनाती रही।600 चिड़िया बनाने के बाद वह बिलकुल टूट चुकी थी।

उस बारह साल की सडाको की बनाई चिड़ियाँ उसकी माँ सम्भाल कर रखती रही।उसके दोस्त उसे हौसला देते।आखिर 644 चिड़िया बनाने के बाद उस हिम्मती लड़की ने अपनी आखरी साँस ली।सडाको ल्यूकेमिया बीमारी से पीड़ित थी।हिरोशिमा,जापान में जन्मी सडाको को यह बीमारी परमाणु बम के अटैक से विरासत में मिली थी।वही परमाणु बम जिसके गिराने की आज बरसी है।वही बम जिसने सडाको समेत करोणों बच्चों की जिंदगियां बर्बाद करदी।बच्चों की मुस्कान की जगह वह तक़लीफ़ लिख दी,जो हर साल उभर आती है।सडाको को उसके साथियो ने खूब हिम्मत दी थी।उसकी मौत के बाद उसके दोस्तों ने बाकि चिड़िया बनाई और एक हज़ार की गिनती पूरी करके सडाको की कब्र में रखा।

आज भी हिरोशिमा समेत पूरी दुनिया में लोग एक हज़ार कागज़ की चिड़िया बनाकर,अपनी संवेदना दिखाते और इसी से न्यूक्लियर बम का विरोध करते हैं।हम भी इन चिड़ियों को बनाते हैं।हर साल सडाको के साथ इस विनाशक हथियार का विरोध करते हैं।एक बार उस सडाको की तरह बिस्तर पर पड़े,अपने आप को रोज़ मरते हुए देखिये।अपने जिस्म को अपनी आँखों के सामने अपाहिज होते देखिये।अपनी मुस्कान को एक दर्द में बदलते देखिये तो एहसास होगा की विनाश क्या होता है।युद्ध क्या होता है।अपनों को तिल तिल मरते देखना क्या होता है। जिसने ढहते घर न देखें हों,अक्सर वह नीव की ईंट निकालकर जश्न ही मनाते हैं, फिर वही घर के नीचे दबकर मर जाया करते हैं ।

न्यूक्लियर बम ज़मीन के लिए बेहद बुरे हैं।दुनिया को इनसे पीछा छुड़ाना ही होगा।वरना फिर कोई पागल उठेगा और करोणों जिंदगियां बिखर जाएँगी।आज हिरोशिमा परमाणू बम की बरसी है।हो सके तो एक कागज़ की चिड़िया बनाइये और अपने बच्चे को दीजिये।बच्चा अगर मुस्कुरा दे तो समझ लीजिये मेरी सडाको मुस्कुरा रही है।वह हम सबमे ज़िंदा है।काश हम हथियारों से नफ़रत छोड़ मुस्कुराहट से मोहब्बत कर लें।नफ़रत हारेगी सडाको।पक्का हारेगी।तुम्हारे जाने के बाद तुम्हारी ज़मीन ने करवट ली,अब वहाँ सुक़ून है सडाको जैसा तुम सोचती थीं,वैसा सुक़ून....

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