राजनीति में हो सकता है रास्ते अलग हों,विचार में भी हम दोनों विपरीत ध्रुव हैं मगर यह बहुत गहरे दुःख की बात है कि वह आवाज़ हमारे बीच से चली गई,जो सड़क से संसद तक गूंजा करती थी । सुषमा स्वराज जी के लिए शोक में भीगे शब्द लिखने पड़ेंगे,इससे पीड़ा दायक मेरे लिए आज भले क्या होगा ।
संसद में एक स्पष्ट आवाज़, शानदार भाषा,विचारों की अडिगता और लोकतांत्रिक आचरण की काया,हम सबके देखते देखते ईश्वर से जा मिली । आज जो सरकार है, जो भयँकर बहुमत है, वह सुषमा जी जैसे व्यक्तित्व की अथाह मेहनत का परिणाम है ।
हम सभी से कहते हैं कि अगर तुममे कोई विचार पनप रहा है, तो सुषमा जी से सीखना । उनके साथियों से भी सीखना । तुम्हे उस विचार के स्थापित होने से पहले जीवित भी रहना होगा,लड़ना भी होगा,बिना निराश हुए,अंत तक संघर्ष करना होगा । सुषमा जी पर ईश्वर की कृपा ही थी कि जिस विचार को उन्होंने अपने मस्तिष्क में जगह दी,शरीर से उसके लिए संघर्ष किया, उनकी आंख बंद करने से पहले वह पूरे भारत वर्ष में फल फूलकर स्थापित हो गया । उनकी आखरी सांस ने भी उनका साथ निभाया और जम्मू कश्मीर के उनके विचार,उनके सामने पूरे हो गए ।
मैं सुषमा जी से व्यक्तिगत सम्बन्धो,व्यक्तिगत मुलाकातों पर नही लिखूँगा । क्योंकि व्यक्तिगत अनुभव सबके ही समान हैं, वह बेहतरीन थीं । बतौर विदेश मंत्री,बतौर अपनी आखरी राजनैतिक पारी सुषमा जी ने वह मुकाम पा लिया था,जिसको हर राजनैतिक और सामाजिक व्यक्ति पाने को तरसते हैं । इस आखरी पारी और उसके कामो से सुषमा जी ने सबके दिलों में कभी न मिटने वाली छाप छोड़कर विदा ली । हम भी कह सकेंगे कि हमने सुषमा जी को खूब ऊपर चढ़ते हुए अनन्त की ओर जाते देखा था ।
भारत देश के महान लोकतंत्र की एक हिस्सा सुषमा स्वराज जी हम सब बेहद दुःख में हैं । नमन और निधन लिखने पर उंगलियां कांप रहीं हैं । हम बस इतनी प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर अपने विचारों के प्रति जितनी मेहनत,लगन और ईमानदारी आप मे थी,ईश्वर उतनी ही हिम्मत,मेहनत,लगन और ईमानदारी हमे भी हमारे विचारों के प्रति दे । ॐ शांति !
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