Sunday, August 4, 2019

नाग पँचमी

तमाम किस्से हैं, तमाम बातें हैं नाग पँचमी के लिए,कोई दूध पिलाता है तो कोई दूध से नहलाता है । कोई सेठ जी की सातवीं बहु के मुँह बोले भाई बने नागराज के किस्से सुन सुन झूमता है । कोई आज अखाड़े में पहलवानी के दाँव पेंच लगा पटखनी देगा,तो कोई धूल मिट्टी में पटखनी खाएगा ।

मैं तो बस यही देख पा रहा हूँ,यह कैसे लोग हैं । जिनको साँप से भी मोहब्बत करना सिखाई गई हो,वह अब दूसरों से नफ़रत के पाठ पढ़ा रहें हैं । हमें उनपर तो और तरस आता है, जो कहते हैं कि हम कब तक सहिष्णुता रखते,लगता है जैसे कि अच्छे होने की कोई एक्सपायरी डेट भी होती है । अरे पूरी दुनिया बुरी हो जाए,फिर भी अपने अंदर की अच्छाइयां खत्म नही की जाती । प्रेम की एक्सपायरी डेट नही होती,इसके खत्म होने से बस खत्म हुआ जाता है ।

मैं शिव जी को मानता हूँ । उनके गले में झूलते साँप को देखता हूँ । जब आप शिव होते हैं, तो ज़हर भी ज़हर नही लगता है । मैं बार बार सोचता हूँ कि मेरा दिल इतना बड़ा हो जाए कि मेरे दुश्मन मेरे हर वक़्त नज़दीक़ रहें,खुश रहें,आनंदित रहें ।

खैर आज नाग पंचमी है । तमाम लोग इसमे बुराइयाँ निकालेंगे । कोई इस संस्कृति पर चोट करेगा । कोई इसके बहाने धर्म पर चोट करेगा । कोई उस विचार पर प्रहार करेगा । कोई श्रद्धा में लहालोट होकर हर हर महादेव जपेगा । कोई सर झुकाकर निकल लेगा । सब तरह के लोग,सब तरह की बातें करते हुए निकल ही जाएँगे । यही तो मुल्क की खूबसूरती है । हम तो इतना ही कहेंगे कि अगर सीख सको,तो सीख लो प्रेम को,हर एक से प्रेम को,हर एक मे दिल है, जहां दिल है वहाँ प्रेम है । जिसमे प्रेम है, वह जीवित है । वह शिव का है ।
मेरे लिए नागपंचमी सीखने की जगह है,मुझे पता है, सांप को दूध पिलाने से वह मर सकता है, उसका भोजन नही है दूध,इसलिए उससे प्रेम करो,ऐसा प्रेम नही की उसके जीवन पर संकट आ जाए ।
मैं शिव जी से बस इतना कहता हूँ कि मुझे इतना धैर्य और समर्पण और त्याग दे,की मेरी आस्तीन में बैठे सांप मेरे गले मे झूलने लगें,बेखौफ,मदमस्त,अल्हड़ से,मेरे खिलाफ रहने वाले विचार मेरी बढ़ती ताकत से डरे नहीं, तबही मेरी विशालता महानता कहलाएगी अन्यथा शून्य.....

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